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सोमवार, 23 जून, 2008 को 14:02 GMT तक के समाचार
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बोर्ड को ज़मीन देने के मामले पर विरोध

कश्मीर में प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)
पर्यावरणवादियों का कहना है कि हस्तांतरित ज़मीन पर निर्माण कार्य से पर्यावरण को ख़तरा है
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर जंगल की ज़मीन दिए जाने के विरोध में सोमवार को भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़े और बल का प्रयोग किया.

प्रमुख अलगवादी नेता सैय्यद अली शाह गीलानी इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे.

राज्य सरकार ने अमरनाथ गुफ़ा की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए शौचालय और झोपड़ी बनाने के उद्देश्य से जंगल की ज़मीन अमरनाथ मंदिर बोर्ड को हस्तांतरित किया है.

भीड़ को संबोधित करते हुए गीलानी ने कहा, "बोर्ड को ज़मीन देना ग़ैर कश्मीरी हिंदुओं को घाटी में बसाने की एक साज़िश हैं ताकि मुस्लिम समुदाय घाटी में अल्पसंख्यक हो जाएँ."

उन्होंने ज़मीन के हस्तांतरण के आदेश को रद्द करने की माँग की है. साथ ही उनका कहना था कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड का ज़िम्मा कश्मीरी पंडि़तों के हाथों में सौंप दी जाएँ.

 बोर्ड को ज़मीन देना ग़ैर कश्मीरी हिंदुओं को घाटी में बसाने की एक साज़िश हैं ताकि मुस्लिम समुदाय घाटी में अल्पसंख्यक हो जाएँ
सैय्यद अली शाह गीलानी

गिलानी ने अपने समर्थकों से कहा कि वे घाटी में हिंदुओं और अन्य अपसंख्यकों की सुरक्षा और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का ध्यान रखें.

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के इस धमकी की निंदा की कि यदि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर जंगल की ज़मीन दिए जाने का विरोध वापस नहीं लिया जाएगा तो वे घाटी में ज़रूरी सामानों की आपूर्ति को रोक देंगे.

विरोध प्रदर्शन में हिस्सेदारी को रोकने के उद्देश्य से पुलिस ने अलगवावादी नेता शब्बीर शाह को अन्य नेताओं के साथ सोमवार की सुबह हिरासत मे ले लिया था. पुलिस ने प्रमुख अलगवादी नेता मुश्ताक़ुल इस्लाम को भी हिरासत में ले लिया था.

पर्यावरण पर असर

उधर जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट के चेयरमैन यासीन मलिक ने चेतावनी दी है कि यदि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी जाने वाली ज़मीन को रद्द नहीं किया गया तो वे आमरण अनशन पर बैठ जाएँगे.

पर्यावरणविदों का कहना है कि वहां पर निर्माण कार्य से पर्यावरण को क्षति पहुँचेगी.

'प्रो–इंडिया नेशनल कांग्रेस पार्टी' के अध्यक्ष फ़ारुख़ अब्दुल्ला का कहना है कि सरकार को ज़मीन हस्तांतरण करने से पहले पर्यावरण पर निर्माण कार्यों का पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण कर लेना चाहिए था.

अमरनाथ गुफ़ा की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की देखभाल करने के लिए अमरनाथ मंदिर बोर्ड की स्थापना की गई थी.

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