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शनिवार, 09 अगस्त, 2008 को 06:54 GMT तक के समाचार
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बातचीत से महबूबा, फ़ारुख़, सैफ़ुद्दीन बाहर

जम्मू में सैनिक
पिछले दो हफ़्तों से जम्मू में संघर्ष के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ मंदिर ज़मीन मुद्दा सुलझाने के लिए 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की अमरनाथ संघर्ष समिति से बातचीत शुरू हो गई है.

नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फ़ारूख़ अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीडी की महबूबा मुफ़्ती और कांग्रेस के सैफ़ुद्दीन सोज़ को बातचीत से अलग रखा गया है.

अमरनाथ संघर्ष समिति ने इन तीनों को अलग रखने की शर्त पर ही बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी.

अमरनाथ मंदिर ज़मीन विवाद सुलझाने के लिए दिल्ली से गृह मंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में 18 सदस्यों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू पहुँचा है.

अमरनाथ संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने ये कहते हुए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने से इनकार कर दिया था कि फ़ारूख़ अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती और सैफ़ुद्दीन सोज़ को बातचीत से अलग रखा जाए.

संघर्ष समिति के सदस्य इन नेताओं को स्थिति के इस कगार तक पहुँचने
के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

संघर्ष समिति के इस रवैए को देखते हुए पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि यदि वे ऐसा चाहते हैं तो कश्मीरी नेता इस बातचीत में शामिल नहीं होंगे.

जम्मू शहर में कर्फ़्यू ने कोई ढील नहीं दी गई है लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी कई जगह एकत्र हो रहे हैं.

 हमें इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है, यदि इन नेताओं को बातचीत से अलग रखा जाता है
प्रवक्ता, अमरनाथ संघर्ष समिति

उधर, 18 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ बातचीत न हो पाने के बाद, जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा से बातचीत कर रहा है.

अमरनाथ का मुद्दा

ये पूरा विवाद तब शुरु हुआ था जब कांग्रेस के नेतृत्व और पीडीपी के सहयोग वाली ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार ने अस्थायी तौर पर सौ एकड़ ज़मीन अमरनाथ यात्रियों की व्यवस्था के लिए अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने का फ़ैसला किया.

इस पर कश्मीर घाटी में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए, पीडीपी ने सरकार में फ़ैसले के समय शामिल होने के बावजूद अपना पल्ला झाड़ लिया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

हालाँकि सरकार ने ये फ़ैसला वापस ले लिया लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा में समर्थन नहीं जुटा पाई और सत्ता से बाहर हो गई.

सर्वदलीय बैठक
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सर्वदलीय बैठक में प्रतिनिधिमंडल जम्मू भेजने का फ़ैसल हुआ

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला वापस लेने पर और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी बोर्ड की जगह सरकार के हाथ में आ जाने के कारण जम्मू क्षेत्र में भीषण प्रदर्शन शुरु हो गए, जो अब भी जारी है.

अमरनाथ संघर्ष समिति की माँग है कि अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दी जाए और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी फिर बोर्ड ही निभाए.

बंद 14 अगस्त तक

दिल्ली के सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के दौरे से ठीक पहले अमरनाथ संघर्ष समिति ने जम्मू में 14 अगस्त तक बंद को बढ़ाने का ऐलान किया.

उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक राज्य सरकार की ओर से अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले में सकारात्मक प्रस्ताव नहीं आएगा संघर्ष समिति राज्यपाल के प्रतिनिधियों से बातचीत नहीं करेगी.

राज्यपाल एनएन वोहरा ने इस मसले का समाधान निकालने के लिए एक चार सदस्यीय समिति की घोषणा की थी.

उधर सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल भेजने का फ़ैसला प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई बैठक में हुआ था.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमरनाथ संघर्ष समिति ने इन घोषणाओं से केंद्र और राज्य सरकार दोनों को संदेश दे दिया है कि सिर्फ़ बातचीत की औपचारिकताओं से बात बनने वाली नहीं है.

कश्मीर प्रदर्शनएक और विभाजन...?
अमरनाथ मामले ने जम्मू कश्मीर को सांप्रदायिक आधार पर बाँट दिया है.
राह नज़र नहीं आती
दोनों पक्षों की हठधर्मिता के कारण अमरनाथ मसले का हल नज़र नहीं आ रहा है.
अमरनाथ यात्रीअमरनाथ का विवाद...
अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन देने का क्यों हो रहा है विरोध? एक विश्लेषण..
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