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जम्मू में चरमपंथी हमले की चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने चेतावनी दी है कि अमरनाथ ज़मीन विवाद पर जारी आंदोलन का फ़ायदा उठाते हुए चरमपंथी जम्मू में हमला कर सकते हैं. दूसरी ओर इसी मुद्दे पर भारत प्रशासित कश्मीर में लगातार तीसरे दिन बंद के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है. जम्मू से बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी ने बताया है कि सेना के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं. कठुआ, सांबा, रजौरी, उधमपुर और भद्रवाह में पहले से ही कर्फ़्यू जारी है. पुंछ में हुए प्रदर्शनों को देखते हुए वहाँ कर्फ़्यू लगा दिया गया है. शुक्रवार को सेना के कमांडिंग ऑफ़िसर लेफ़्टिनेंट जनरल विनय शर्मा ने पत्रकारों से कहा, "स्वतंत्रता दिवस से पहले यह संवेदनशील समय है और हमारे पास ख़ुफ़िया जानकारी है जिसके मुताबिक चरमपंथी बम धमाके करने की कोशिश कर सकते हैं." उन्होंने लोगों से शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की. लेफ़्टिनेंट जनरल विनय शर्मा ने कश्मीर और जम्मू को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाधा डालने के सवाल पर कहा, "आंशिक बाधा पहुँची है लेकिन इसे हम आर्थिक नाकेबंदी नहीं कह सकते. यातायात सामान्य बनाए रखने के लिए सेना की तैनाती की गई है." उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, "शांति बनाए रखने के लिए लोग सेना का साथ दें. सेना के आदेशों का उल्लंघन और राजमार्ग को बाधित करना राष्ट्र विरोधी गतिविधि मानी जाएगी." जम्मू में अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी गई ज़मीन वापस लेने के विरोध में आंदोलन चल रहा है कि जिसकी अगुआई अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति कर रही है. कश्मीर में बंद उधर भारत प्रशासित कश्मीर में बंद के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है. यहाँ के कुछ संगठनों का कहना है कि जम्मू में राजमार्ग को बाधित कर कश्मीर की आर्थिक नाकेबंदी करने की कोशिश हो रही है. साथ ही जम्मू में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ मारपीट की ख़बरों से घाटी में तनाव फैला है.
श्रीनगर स्थित बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन ने बताया है कि बंद के तीसरे दिन दुकानें बंद हैं और सड़कों पर वाहन न के बराबर चल रहे हैं. कश्मीर से फलों का निर्यात और ज़रुरी सामानों की आपूर्ति में असर पड़ने के कारण श्रीनगर-मुज़फ़्फराबाद राजमार्ग को खोलने के लिए लगातार दबाव बढ़ रहा है. भारत और पाकिस्तान व्यापार के लिए इस रास्ते को खोलने पर पहले ही सहमत हो चुके हैं. अब फल उत्पादकों ने इस फ़ैसले पर जल्दी अमल करने के लिए सोमवार को नियंत्रण रेखा तक मार्च करने की घोषणा की है. निर्यातकों का कहना है कि जम्मू को जोड़ने वाली सड़क बाधित होने के कारण भारतीय बाज़ारों में उनके उत्पाद नहीं पहुँच पा रहे हैं. उनका कहना है कि फलों को सड़ने से बचाने के लिए यही उपाय है कि मुज़फ्फ़राबाद के रास्ते पाकिस्तान में इनका निर्यात किया जाए. इस बीच एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को जम्मू पहुँच रहा है जो अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ बातचीत करेगा. अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के ख़िलाफ़ कश्मीर घाटी में व्यापक प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद राज्य सरकार ने यह फ़ैसला वापस ले लिया था. |
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