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यासीन मलिक अस्पताल में भर्ती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरनाथ ज़मीन विवाद को लेकर आमरण अनशन पर बैठे जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ़) के नेता यासीन मलिक की बिगड़ती हालत को देखते हुए पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया है. गुरुवार को यासीन मलिक की भूख हड़ताल का तीसरा दिन था. डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी. वो जम्मू में आर्थिक नाकेबंदी के ख़िलाफ़ आमरण अनशन पर थे. दूसरी ओर भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के शहर श्रीनगर में लगातार दूसरे दिन दुकानें और बाज़ार बंद हैं. ख़ास बात ये है कि किसी भी चरमपंथी गुट और राजनीतिक पार्टी ने बंद नहीं बुलाया है इसके बावजूद दुकानों पर ताले नज़र आ रहे हैं और सड़कों पर ट्रैफ़िक भी बेहद कम नज़र आ रहा है. बढ़ता तनाव जम्मू में लगातार हो रहे हिंसक प्रदर्शन के बाद कश्मीर में भी तनाव बढ़ता जा रहा है.
ऐसी ख़बरें हैं कि घाटी के ट्रक ड्राइवरों को जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर पीटा भी गया है. घाटी के एक अख़बार 'ग्रेटर कश्मीर' में छपी पत्रकार हरमीत सिंह की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार को अख़नूर के जूरियन इलाक़े में गूजर समुदाय के दर्जनों घरों में आग लगाई गई है. घाटी में गूजरों के नेता मियाँ अल्ताफ़ अहमद ने हिंसा के लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. अल्ताफ़ अहमद का कहना है कि सरकार हिंसा पर काबू नहीं कर पा रही है जो कि यहाँ के लोगों के लिए अच्छा नहीं है. हालांकि, श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही दोबारा बहाल हो गई है लेकिन घाटी के ट्रक ड्राइवर जम्मू की तरफ अपनी गाड़ियाँ ले जाने में कतरा रहे हैं. इस वजह से घाटी के फल उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है. रोज़ाना करोड़ों रुपयों का नुक़सान हो रहा है. श्रीनगर में दवाइयों की भी कमी हो गई है. स्थानीय अख़बार शादियाँ टाल दिए जाने के इश्तहार से भरे हुए हैं क्योंकि यहाँ बंद और प्रदर्शनों की वजह से गोश्त की कमी हो गई है. |
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