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बुधवार, 13 अगस्त, 2008 को 02:33 GMT तक के समाचार
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जम्मू कश्मीर में तनाव, कर्फ़्यू जारी
फ़ायरिंग में हुई मौत
सुरक्षाबलों की फ़ायरिंग में कई जगह प्रदर्शनकारियों की मौत हुई
भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर में कई दिनों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के कारण पूरे राज्य में ख़ासा तनाव है. कश्मीर के सभी दस ज़िलों में कर्फ़्यू जारी है.

श्रीनगर में सुबह आठ से ग्यारह बजे तक कर्फ़्यू में ढील दी गई थी लेकिन बाद में यह ढील दोपहर दो बजे तक के लिए बढ़ा दी गई है. अनंतनाग, कोलगाम, अवंतीपुरा, खंडबारा और कुपवारा इलाक़ों में भी कर्फ़्यू में ढील है.

बड़गाम में सुबह तीन घंटे कर्फ़्यू में ढील देने के बाद फिर से कर्फ़्यू लागू कर दिया गया है.

घाटी में मंगलवार को जगह-जगह हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सुरक्षाबलों की गोली से कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी.

उधर जम्मू इलाक़े के किश्तवाड़ में मंगलवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में दो लोगों की मौत के बाद लगाया कर्फ़्यू अभी जारी है.

जम्मू शहर में कर्फ़्यू में दिन में ढील दी गई है लेकिन बंद जारी है.

सोमवार से लेकर अब तक कश्मीर घाटी में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की फ़ायरिंग में 22 लोग मारे जा चुके हैं.

इस बीच हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेताओं ने घाटी में लोगों से अपील की है कि वे प्रदर्शन के दौरान हिंसा का सहारा न लें.

घाटी में तनाव

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में तेरह साल बाद पहली बार कश्मीर के सभी दस ज़िलों में कर्फ़्यू लगाना पड़ा है.

 जम्मू में जारी विरोध प्रदर्शन और राजमार्गों को रोकने का सिलसिला बंद होना चाहिए. इससे घाटी में रहने वाले कश्मीरियों पर असर हो रहा है क्योंकि वे अपना सामान बाहर नहीं भेज पा रहे हैं. यदि भाजपा और अन्य दल अपना अभियान वापस नहीं लेते हैं तो राज्य में आने वाले दिनों में और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है
फ़ारूख़ अब्दुल्ला

श्रीनगर में सुबह आठ बजे से छह घंटे के लिए कर्फ़्यू में ढील दी गई है.

जबकि बड़गाम में तीन घंटे की छूट के बाद फिर से कर्फ़्यू लगा दिया गया है. ख़बरें हैं कि वहाँ कुछ लोग कर्फ़्यू का उल्लंघन करके सड़कों पर नज़र आ रहे हैं.

बुधवार को श्रीनगर में एक शवयात्रा निकली है लेकिन वह शांतिपूर्ण रही है.

लेकिन सोपोर में कुछ लोग कर्फ़्यू का उल्लंघन करके सड़क पर उतर आए थे जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने अश्रुगैस के गोले छोड़े हैं.

पुलिस के अनुसार मंगलवार को कश्मीर घाटी के विभिन्न इलाक़ों में हिंसक भीड़ पर सुरक्षाबलों की फ़ायरिंग में 13 लोग मारे गए थे और कई अन्य लोग घायल हुए थे.

मंगलवार को हज़ारों लोग ग़ाजीगुंड, अनंतनाग और गंदरबल क्षेत्रों में सड़कों पर उतर आए थे.

ये लोग सोमवार को हुई फ़ायरिंग और हुर्रियत नेता शेख़ अब्दुल अज़ीज़ की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे.

'स्थिति गंभीर हो सकती है'

सोमवार को मुज़फ़्फ़राबाद मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों पर सेना की फ़ायरिंग में हुर्रियत नेता अज़ीज़ सहित सात लोगों की मौत हो गई थी और पूरी घाटी में तनाव फैल गया था.

मंगलवार को अज़ीज़ का अंतिम संस्कार किया गया और इसमें शामिल होने के लिए पूरी घाटी से हज़ारों लोग श्रीनगर पहुँचे थे.

घाटी में प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान का झंडा भी लहराता दिखा

मंगलवार को हुई हिंसा के बाद हुर्रियत कॉफ़्रेंस के नेताओं ने घाटी के लोगों से अपील की है कि वे प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं से बचें.

उधर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ़्रेस नेता फ़ारूख़ अब्दुल्ला ने कहा है, "जम्मू में जारी विरोध प्रदर्शन और राजमार्गों को रोकने का सिलसिला बंद होना चाहिए. इससे घाटी में रहने वाले कश्मीरियों पर असर हो रहा है क्योंकि वे अपना सामान बाहर नहीं भेज पा रहे हैं."

उनका कहना था कि यदि भाजपा और अन्य दल अपना अभियान वापस नहीं लेते हैं तो राज्य में आने वाले दिनों में और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है."

किश्तवाड़ में कर्फ़्यू जारी

दूसरी ओर जम्मू में बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार जम्मू इलाक़े के किश्तवाड़ में मंगलवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद तनाव बना हुआ है और प्रशासन ने कर्फ़्यू जारी रखने का निर्णय लिया है.

मंगलवार को किश्तवाड़ में सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुए विस्फोट में दो व्यक्तियों की मौत हो गई थी और इसके बाद किश्तवाड़ के इलाक़े में सेना को भी तैनात कर दिया गया था.

पुलिस का कहना है कि यह मौत किश्तवाड़ में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुई झड़पों के कारण हुई है.

प्रशासन ने मंगलवार को जम्मू शहर में कर्फ़्यू में दिन भर की छूट दी थी और बुधवार को भी दिन भर की छूट देने का फ़ैसला किया गया है.

लेकिन कर्फ़्यू में छूट के दौरान भी बाज़ार बंद रहे और ज़रुरी सामान की इक्कादुक्का दुकानों के अलावा दुकानें बंद रहीं.

इस बंद का ऐलान अमरनाथ संघर्ष समिति ने किया है.

जम्मू कश्मीर में यह विवाद अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के सरकार के फ़ैसले के साथ शुरु हुआ था.

सरकार ने 100 एकड़ ज़मीन अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने के बाद इसे वापस ले लिया था क्योंकि इसके विरोध में कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शन शुरु हो गए थे.

ज़मीन वापसी के बाद से जम्मू में प्रदर्शन चल रहे हैं और इस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं.

राह नज़र नहीं आती
दोनों पक्षों की हठधर्मिता के कारण अमरनाथ मसले का हल नज़र नहीं आ रहा है.
जम्मू में प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)जम्मू में सेना
जम्मू शहर में बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए सेना को बुलाया गया है.
अमरनाथ यात्रीअमरनाथ का विवाद...
अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन देने का क्यों हो रहा है विरोध? एक विश्लेषण..
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