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'हमारे पास समर्थन वापसी ही विकल्प' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वामपंथी गठबंधन के घटक फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवव्रत विस्वास ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जी-8 बैठक से वापसी के बाद वामपंथी दल 10 जुलाई को यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे. वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने भी प्रधानमंत्री के ताज़ा बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अब वामदलों के पास समर्थन वापसी के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है. सोमवार को अपनी जापान यात्रा पर रवाना होने के बाद साथ जा रहे पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार अमरीका के साथ परमाणु क़रार के मुद्दे पर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के पास जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार को वामदलों के समर्थन वापस लेने से कोई ख़तरा नहीं है और अगर बहुमत साबित करने की ज़रूरत पड़ी तो संसद में ऐसा साबित करने के लिए संसाधन हैं. प्रधानमंत्री के इस ताज़ा बयान पर वामदलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है. वामनेता देवव्रत विस्वास ने कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''वामदल 10 जुलाई को समर्थन वापस ले लेंगे. ये चार वामपंथी दलों- सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक का साझा फ़ैसला है.'' उनका कहना था,'' कांग्रेस के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार देशहित को नज़रअंदाज़ कर अमरीका के साथ 123 समझौते पर वचनबद्ध नज़र आ रही है. इसलिए समर्थन वापसी का फ़ैसले में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.'' चेतावनी ख़बरों के अनुसार फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवव्रत विस्वास ने सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत से टेलीफ़ोन पर भी बात की. इसके पहले सोमवार को विदेशमंत्री ने परमाणु समझौते पर वामपंथी दलों के सामने एक और दौर की बातचीत का प्रस्ताव रखा. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी यूपीए और वामपंथी दलों की समन्वय समिति के प्रमुख हैं, उन्होंने वामपंथी दलों के नेताओं को एक पत्र लिखकर 10 जुलाई को एक और दौर की बातचीत का प्रस्ताव रखा है. सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा,'' हमें पत्र मिला है और हमारी कल (मंगलवार) बैठक है जिसमें भविष्य की रणनीति तय की जाएगी.'' आरएसपी के महासचिव टीजे चंद्रचूडन ने कहा,'' पत्र में कोई वादा नहीं किया गया है. हम इस पर मंगलवार को विचार करेंगे.'' सवाल जवाब ग़ौरतलब है कि वामपंथी दलों ने एक पत्र लिखकर सरकार से पूछा था कि वह सात जुलाई तक बताए कि वो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए से अंतिम चरण की वार्ता कब करने जा रही है?
वामपंथी दल पहले भी सरकार को चेतावनी दे चुके हैं कि यदि सरकार आईएईए के साथ परमाणु समझौते पर अंतिम दौर की बातचीत के लिए आगे बढ़ती है तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे. वामदलों का मानना है कि भारत-अमरीका परमाणु क़रार भारत के हितों से समझौता है. वे लगातार इस समझौते का विरोध करते आए हैं और कहते रहे हैं कि इस समझौते से भारत की निष्पक्ष और स्वतंत्र विदेश नीति को धक्का लगेगा और अमरीका का भारत की परमाणु नीति पर अनुचित प्रभाव कायम हो जाएगा. जबकि सरकार का कहना है कि समझौता देशहित में है और इससे भारत की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी होंगी. उल्लेखनीय है कि वामपंथी दलों के समर्थन वापसी से सरकार अल्पमत में आ जाएगी लेकिन समाजवादी पार्टी ने सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. |
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