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'एलटीटीई पारंपरिक लड़ाई हार चुका है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल सरथ फ़ोनसेका का दावा है कि एक पारंपरिक शक्ति के तौर पर एलटीटीई अपनी जंग हार चुका है. सरथ फ़ोनसेका ने बताया कि श्रीलंका सेना लगातार उत्तर की दिशा में बढ़ती जा रही है और अगले एक साल में सेना लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम(एलटीटीई) के दबदबे वाले इलाके पर काबिज़ हो जाएगी. लेकिन फ़ोनसेका ने माना कि इसके बावजूद भी इन इलाकों में हल्की-फुल्की घुसपैठ बरक़रार रहेगी. हालांकि, लेफ़्टिनेंट जनरल के इस दावे पर एलटीटीई की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. वैसे इससे पहले एलटीटीई, श्रीलंकाई सेना के दावों को ख़ारिज कर चुकी है. एलटीटीई का कहना है कि सरकार मारे जाने वालों के जो आंकड़े पेश कर रही है वो ग़लत हैं. 9000 चरमपंथी मरे! लेफ़्टीनेंट जनरल फ़ोनसेका ने बताया कि अगस्त 2006 में युद्ध विराम समाप्त होने के बाद अब तक एलटीटीई के कुल 9000 चरमपंथी मारे जा चुके हैं. चरमपंथी गुट एलटीटीई श्रीलंका की अल्पसंख्यक तमिल आबादी के लिए श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी इलाक़े में एक अलग तमिल देश के मांग कर रहा है. श्रीलंका में सिन्हालियों की आबादी सबसे ज़्यादा है और यहाँ ज़्यादातर सिन्हाली सरकारें ही रही हैं. लेफ़्टीनेंट जनरल फ़ोनसेका ने ये भी कुबूल किया कि चरमपंथियों के ख़िलाफ चल रही इस लड़ाई में श्रीलंका सेना के भी 1700 सैनिक मारे जा चुके हैं. "वो अपनी युद्ध क्षमता गंवा चुके हैं. वो हमसे अब भी लड़ रहे हैं लेकिन उनमें पहले जैसा जोश नहीं दिखाई देता. वो अब रक्षात्मक लड़ाई करते दिखाई देते हैं. पहले हाल ये था कि हम दो या तीन महीनों में सिर्फ़ एक किलोमीटर ही आगे बढ़ पाते थे." मज़बूत हैं चरमपंथी फ़ोनसेका ने माना कि इन इलाक़ों में अब 4000-5000 एलटीटीई चरमपंथी और बाक़ी बचे हैं.
लेफ़्टीनेंट जनरल ने ये भी बताया कि उनकी सेना को रोज़ाना बारूदी सुरंगों और बूबी ट्रैप्स(छलबमों) से दोचार होना पड़ता है जिसमें कई सैनिक अपने हाथ-पैर गंवा कर अपाहिज हो चुके हैं. सरथ फ़ोनसेका का कहना है कि श्रीलंकाई सेना एलटीटीई के इलाकों में काफ़ी अंदर तक घुस चुकी हैं और वो लिट्टे के समुद्री अड्डे के बेहद नज़दीक पहुँच चुकी है. वहीं श्रीलंका की सरकार के मंत्रियों का मानना है कि सेना इसी साल दिसंबर तक एलटीटीई के इलाक़ों में अपना परचम फहरा देगी. पिछले दिनों एलटीटीई ने एक छोटे विमान पर कब्ज़ा कर लिया था जिसकी मदद से वो श्रीलंका की थल और नौसेना पर बम गिरा सकता था. इसके अलावा एलटीटीई ने कई आत्मघाती दस्ते तैयार कर रखे हैं और वो लगातार सेना के अधिकारियों और नेताओं को निशाना बनाता आ रहा है. अप्रैल 2006 में भी एक आत्मघाती हमले में लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ोनसेका बाल बाल बचे थे जब एक महिला ने अतिसुरक्षित सेना मुख्यालय में निशाना बनाने की कोशिश की थी. |
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