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'हर घर से एक नियुक्ति' का आरोप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई पर आरोप लग रहे हैं कि आगामी दिनों में श्रीलंका की सरकार के साथ संभावित टकराव के मद्देनज़र वह युवाओं में ज़ोरदार भर्ती अभियान चला रहा है. एलटीटीई के गढ़ माने जाने वाले किलिनोच्ची के लोगों का आरोप है कि 'हर घर से एक व्यक्ति' को नियुक्त करने की नीति शुरु की है. तमिल अल्पसंख्यकों के वास्ते स्वतंत्र राष्ट्र के लिए श्रीलंका सरकार के साथ संघर्ष कर रहे एलटीटीई विद्रोहियों को सेना ने पूर्वी द्वीप से खदेड़ दिया है, लेकिन उत्तरी क्षेत्र में एक बड़े हिस्से पर अब भी विद्रोहियों का कब्ज़ा है. किलिनोच्ची के बाज़ार में भी नज़ारा एलटीटीई के कब्ज़े वाले दूसरे इलाकों जैसा ही है. जगह-जगह दीवारों पर तमिल विद्रोहियों के पोस्टर चिपके हैं. इन पोस्टरों में तमिल विद्रोहियों को स्वचालित राइफ़लें लिए दिखाया गया है. साथ ही संगठन से जुड़ने के लिए नारे भी लिखे गए हैं. 'ज़बरदस्ती' अब नए प्रमाण मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि एलटीटीई आम नागरिकों में से युवाओं को 'जबरन' भर्ती कर रहा है. सुरक्षा की खातिर अपनी पहचान छिपाने वाले एक युवक ने कहा, "उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मेरे परिवार में कोई एलटीटीई का सदस्य है. मेरे मना करने पर उन्होंने कहा कि फिर मुझे एलटीटीई से जुड़ना होगा. क्योंकि हर परिवार से एक एलटीटीई सदस्य होना ज़रूरी है." इस व्यक्ति ने बताया कि इसके बाद उसका अपहरण कर लिया गया और तमिल विद्रोही बनने के लिए मजबूर किया गया. लेकिन वह विद्रोहियों के चंगुल से निकल भागने में कामयाम रहा और अब छिपता फिर रहा है. ऐसा नहीं है कि एलटीटीई सिर्फ़ पुरुषों पर ही ज़ोर ज़बरदस्ती कर रहा है. महिलाओं को भी बड़ी संख्या में भर्ती किया जा रहा है. एक महिला ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बीबीसी को बताया, "हर घर को एक पत्र मिला है. उन्होंने मेरा नाम रेखांकित किया और कहा कि मुझे एलटीटीई में भर्ती किया जाएगा. उन्होंने तारीख और समय भी बताया और कहा कि मुझे खुद को उन्हें सौपना होगा." उन्होंने कहा, "अगर घर का कोई सदस्य संगठन से नहीं जुड़ता है, तो वे जबरन उसे घर से ले जाएँगे." अगली जंग माना जा रहा है कि तमिल विद्रोही 'अगली जंग' की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन एलटीटीई की राजनीतिक शाखा के प्रमुख एसपी तमिलसेलवन इससे इन्कार करते हैं. उनका कहना है, "हमने कुछ व्यवहारिक दिशानिर्देश जारी किए हैं. इसकी वजह ये है कि कई मामलों में एक ही परिवार के दो, तीन या यहाँ तक कि चार-चार सदस्य संगठन से जुड़े हैं." तमिलसेलवन कहते हैं, "इससे इन परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है. इसके अलावा हम कम उम्र के बच्चों को वापस घर भेज रहे हैं और वयस्कों से संगठन से जुड़ने की अपील कर रहे हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें "तमिल राष्ट्र के अलावा विकल्प नहीं"27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी ठिकानों पर हमले की धमकी12 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस कोलंबो से तमिलों को निकालने पर रोक08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस कोलंबो से निकाले जा रहे हैं तमिल07 जून, 2007 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों ने फिर किया हवाई हमला29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका के पूर्वोत्तर भाग में लड़ाई23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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