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पूर्व तमिल विद्रोहियों की चुनावी जीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वी श्रीलंका में दस साल में पहली बार हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में तमिल विद्रोहियों से अलग हुए गुट को ज़बरदस्त क़ामयाबी मिली है. पूर्वी श्रीलंका के शहर बट्टिकलोवा के आसपास हर स्थानीय निकाय पर तमिल मक्कल विदुतलाई पुलिकल पार्टी (टीएमवीपी) के उम्मीदवार जीते हैं. वर्ष 2004 में टीएमवीपी, तमिल विद्रोही संगठन (एलटीटीई) से अलग हो गई थी. उसके बाद से ही इस गुट को श्रीलंका सरकार का समर्थन मिलता रहा है. सोमवार को वहाँ नौ स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ. इनमें से सभी नौ सीटों पर टीएमवीपी के उम्मीदवारों ने बाज़ी मारी है. सोमवार की पूरी रात वोटों की गिनती का काम चलता रहा. बट्टिकलोवा के सहायक चुनाव अधिकारी थुराइसिंगम कृष्णननथिलंगम ने समाचार एजेंसी रॉएटर्स को बताया, "पूरे दिन में 60 फ़ीसद मतदान हुआ था. जितने वोट पड़े उनमें से टीएमवीपी के उम्मीदवारों को 70 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिले हैं." इन स्थानीय चुनावों को उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका के बाक़ी इलाक़ों में होने वाले चुनावों की 'रिहर्सल' के तौर पर देखा जा रहा है. श्रीलंका सरकार इन इलाक़ों में भी जल्द ही चुनाव कराना चाहती है. राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का कहना है ये चुनाव पूर्वी श्रीलंका में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएंगे. पिछले साल जुलाई में ही कई महीनों तक चली लंबी लड़ाई में श्रीलंका सेना ने तमिल विद्रोहियों को यहां से बाहर धकेल दिया था. टीएमवीपी ने इस लड़ाई में सेना की मदद की थी. चुनावों का बहिष्कार श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी यूनाइटेड नेशनल पार्टी यानी यूएनपी और मुख्य स्थानीय पार्टी तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) ने इन चुनावों का बहिष्कार किया था. इन पार्टियों का कहना था कि वो हथियार नहीं छोड़ने वाली पार्टी यानी टीएमवीपी के साथ चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. ये पार्टियां राष्ट्रपति राजपक्षे को शिकायत कर चुकी हैं कि वो टीएमवीपी को हथियार छोड़ने को कहें. इस चुनावों में ज़बरदस्त कामयाबी हासिल करने वाली पार्टी टीएमवीपी पर हथियार रखने और हिंसा में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं.
टीएमवीपी पर सेना में नाबालिग़ लड़कों को भर्ती करने का इल्ज़ाम भी लगता रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि इस कामयाबी के बाद प्रदीप मास्टर बट्टीकलोआ के अगले मेयर बन सकते हैं. समाचार एजेंसियों के अनुसार प्रदीप मास्टर जब तमिल विद्रोहियों के साथ जुड़े थे तो वो भी नाबालिग़ ही थे. श्रीलंका में चुनावों पर निगरानी रखने वाली स्वतंत्र एजेंसी पीपल्स एलायंस के प्रमुख किंग्सले रोडरिगो के मुताबिक, टीएमवीपी में सिर्फ़ टीएमवीपी ही नहीं बल्कि तमिल मुस्लिम गुट भी हथियार रखते हैं. इन चुनावों में तमिल मुस्लिम पार्टी ने भी हिस्सा लिया था. |
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