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अजमेर में दो संस्कृतियों का मिलन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान के अजमेर शहर में रविवार की रात एक ऐसी शादी हुई जिसे दो संस्कृतियों का मिलन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. ये शादी थी श्री लंका के ईलम पीपुल्स रेवोल्युशनरी लिबरेशन फ्रंट के नेता वरदराजन पेरुमाल की पुत्री कनक और राजस्थान के मनोज अग्रवाल की. विवाह समारोह बहुत ही कड़ी सुरक्षा मे संपन हुआ. मनोज अग्रवाल जहां मारवाड़ी परिवार से हैं वहीं कनक श्रीलंका के तमिल समुदाय से है. श्री लंका मे जाफना प्रान्त के मुख्य मंत्री रहे पेरुमाल ने अपने निर्वासन का लंबा वक्त अजमेर मे ही अपने परिवार के साथ बिताया है.हालांकि पेरुमाल परिवार अब अजमेर मे नही रहता और यहाँ से कही और चला गया है लेकिन कनक को इस शहर से गहरा लगाव हो गया क्योंकि कनक ने अपनी पढ़ाई अजमेर मे ही की थी और इसी दौरान मनोज और कनक में प्यार हुआ था. इस विवाह समारोह के बारे मे अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नही थे क्योंकि इससे पेरुमाल की सुरक्षा को खतरा पहुंचने का अंदेशा था. अजमेर से मिली ख़बरों के मुताबिक विवाह मे दोनों पक्षों के चुनिदा रिश्तेदारों ने ही भाग लिया. इन रिश्तेदारों के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पास जारी किए थे और उन्हीं लोगों को विवाह स्थल पर जाने दिया गया,जिनके लिए पास स्वीकृत किए गए थे. मनोज और कनक की सगाई शनिवार को हुई थी और सगाई के दौरान पेरुमाल स्वयं उपस्थित भी नहीं थे लेकिन बाकी परिजन वहाँ मोजूद थे. यह शादी ऐसे दो लोगों की है जिनमें से एक श्रीलंका से तमिल संस्कृति मे पली बढ़ी तो मनोज ठेठ राजस्थानी परिवेश मे पले बढ़े हैं. दोनों मे उस वकत प्यार परवान चढा जब वाणिज्य विषय की पढ़ाई करते हुए साथ ये दोनों एक साथ ट्यूशन पढ़ने जाते थे. कनक अपने पिता की सबसे बड़ी पुत्री है.इस लिहाज से पेरुमाल परिवार की ये पहली शादी है. शुरु मे दोनों परिवारों को ये रिश्ता जमा नही, मगर जब कनक और मनोज ने अपने प्यार पर अडिग रहने की दुहाई दी, तो परिजन भी मान गए. पेरुमाल अभी भी तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई यानि लिट्टे की हिट लिस्ट में बताए जाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जनरल नहीं, श्रद्धालु मुशर्रफ़ ने मत्था टेका16 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस अजमेर में औरतों की इबादत पर विवाद15 जून, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी ज़ायरीनों का स्वागत नहीं06 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस ख़्वाजा की दरगाह में ड्रेस कोड की तैयारी18 मई, 2007 | भारत और पड़ोस सवा तीन सौ साल पुराना क़ुरान बरामद09 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस धमाका डिगा नहीं पाया इबादत से12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस इस बार दरगाह के ख़ादिम नहीं मनाएंगे ईद12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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