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अजमेर में औरतों की इबादत पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान में अजमेर स्थित ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर औरत-मर्द, हिंदू-मुसलमान सभी हाज़िरी देने आते हैं लेकिन वहाँ औरतों के मुख्य मज़ार के सामने बैठ कर इबादत करने पर जो विवाद खड़ा हुआ है आख़िर उसमें कितना दम है. दरगाह के कुछ ख़ादिमों ने मुख्य मज़ार के सामने बैठकर औरतों की इबादत पर ऐतराज़ जताते हुए कहा है कि इससे मर्दों की नमाज़ में ख़लल पैदा होता है. इस पर दरगाह प्रबंधन का कहना है कि यह महज़ प्रबंधन की समस्या है, जिसे ठीक कर लिया जाएगा. इमामों के एक संगठन से जुड़े एफएस हसन चिश्ती ने इस बाबत दरगाह कमेटी को ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. हसन चिश्ती कहते हैं, "कहीं भी औरत-मर्द एक साथ बैठकर नमाज़ नहीं पढ़ते. यहाँ दरगाह में जुमे की नमाज़ के दौरान महिलाओं की आवाजाही और वहाँ बैठकर इबादत करने से ख़लल पैदा होता है." इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए हसन चिश्ती का मानना है कि नमाज़ के दौरान महिला सामने आ जाए तो नमाज़ ज़ाया यानी व्यर्थ मानी जाती है. दरगाह के नाज़िम अब्दुल अलीम कहते हैं, "औरतों के लिए पहले से ही दरगाह के झालरा और मक़बरा में अलग से कबाला की जाती है. हाँ, कभी कभी श्रद्धालुओं की ज़्यादा भीड़ होने से समस्या पैदा हो जाती है. यह सिर्फ़ इंतज़ाम की बात है जिसे दुरुस्त कर लिया जाएगा." अलीम कहते हैं कि सऊदी अरब में भी औरत-मर्द के लिए नमाज़ की अलग-अलग व्यवस्था है. इस ऐतिहासिक दरगाह में पहली बार उठे इस तरह के विवाद पर ख़ादिमों की संस्था अंजुमन के सचिव सरवर पिश्ती कहते हैं, "यह कोई मसला नहीं है. सिर्फ़ ज़्यादा भीड़ होने पर कभी-कभी समस्या खड़ी हो जाती है." लेकिन एफएस हसन चिश्ती कहते हैं कि इस्लाम में नमाज़ के लिए पहले मर्द का नंबर है. जबकि अजमेर की एक महिला नुसरत की नज़र में यह औरत-मर्द के बीच भेदभाव का मुद्दा क़तई नहीं है. नुसरत कहती हैं, "देखिए जुमे की नमाज़ में मर्दों के लिए ज़्यादा जरूरी है कि वे जमात से नमाज़ पढ़ें. औरतें एक-एक करके भी पढ़ सकती है. यह ज़रूरी नहीं है कि औरतें भी उसी वक़्त नमाज़ पढ़ें." ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने कभी इंसानियत को औरत-मर्द, जात-बिरादरी और मज़हब में बाँट कर नहीं देखा. इसलिए अमन और भाईचारे के पैग़ाम की यह आवाज़ आज भी दुनियाभर में शिद्दत से सुनी जा रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें अजमेर मामले की जाँच की मांग31 मार्च, 2002 | पहला पन्ना घड़ी वाली दरगाह है एकता की डोर12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जनरल नहीं, श्रद्धालु मुशर्रफ़ ने मत्था टेका16 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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