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बैंसला राजे से मिलने पहुँचे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में लगभग चार हफ़्ते पुराने गूजर आंदोलन को सुलझाने के प्रारंभिक संकेतों के बाद ख़बर मिली है कि दोनों पक्षों के बीच अब भी गतिरोध जारी है. गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से सीधी बातचीत करने के लिए उनके दफ़्तर पहुँचे हैं. राज्य का गूजर समुदाय अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहा है. पिछले चार सप्ताह के आंदोलन में पुलिस फ़ायरिंग और झड़पों में दो पुलिसकर्मियों समेत 41 लोग मारे गए हैं. सकारात्मक संकेत, फिर गतिरोध सरकार और गूजर नेताओं के बीच चार दौर की बातचीत के बाद ख़बर आई थी कि दोनों पक्षों में किसी तरह का समझौता होने की संभावना है. दोनों पक्षों को बुधवार दोपहर संयुक्त संवाददाता में समझौता का विस्तृत वर्णन करना था लेकिन ये संवाददाता सम्मेलन हो ही नहीं पाया. सूत्रों से ख़बर मिली है कि दोनों ओर से रस्साकशी जारी है और समझौते के मसौदे पर सहमति नहीं बन पाई है. जानकारी मिली है कि तीन सुझावों पर चर्चा हो रही है - गूजरों को घुमंतू जनजाति का दर्जा दिया जाए जिसके तहत उन्हें चार से छह प्रतिशत आरक्षण मिले, या फिर उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग में अतिपिछडों का दर्जा दिया जाए. तीसरा सुझाव ये है कि राज्य सरकार केंद्र को पत्र लिखकर गूजरों को जनजाति का दर्जा दिए जाने की सिफ़ारिश कर दे. इस तीसरे सुझाव का भाजपा के कई नेता और भाजपा के मीना समुदाय समर्थक विरोध कर रहे हैं. एक सोच ये भी चल रही है कि सरकार आर्थिक तौर पर पिछड़ों को भी कुछ आरक्षण दे, लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि ये कैसे हो. 'ऐतिहासिक जीत' मंगलवार रात को राजस्थान की राजधानी जयपुर में गूजरों की ओर से निर्णायक दौर की वार्ता की अगुआई कर रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने तब तक हुए 'समझौते' को ऐतिहासिक जीत बताया है. राज्य सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल में शामिल रामदास अग्रवाल और बैंसला ने एकसाथ इस 'समझौते' की चर्चा की थी. दोनों ने कहा था कि वे ख़ुश हैं. हालाँकि समझौते का दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया गया था.
कर्नल बैंसला ने कहा था, "बुधवार को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ मैं समझौते पर औपचारिक दस्तख़त करुँगा और उसके बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा." कर्नल बैंसला ने सिर्फ़ इतना बताया था, "समझौते के तहत आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है उससे किसी अन्य वर्ग को नुकसान नहीं होगा." उन्होंने सबका शुक्रिया अदा किया था और सफल बातचीत के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया. गूजर नेता रामसिंह विधूड़ी ने बीबीसी को बताया था कि 'समझौते' में गूजरों को चार से छह फ़ीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की बात है और यह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कोटे के भीतर ही होगी. यानी ओबीसी कोटे में रहते हुए गूजरों के लिए चार से छह फ़ीसदी सीटें अलग से आरक्षित की जाएँगी. |
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