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'पाकिस्तान भेज सकते हैं सैनिकों को' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में चरमपंथियों से निपटने के लिए वो अपने देश के सैनिकों को पाकिस्तान भेजने के लिए तैयार हैं. राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि पाकिस्तानी सीमा से चरमपंथी आकर अफ़ग़ान लोगों को मार रहे हैं और उनके देश को हक़ है कि आत्मरक्षा के लिए वो जवाबी क़दम उठाए. ये बातें अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने काबुल में एक संवाददाता सम्मेलन में कही. इस बीच कंधार में 15 चरमपंथियों को मार दिया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक इन चरमपंथियों की हत्या कंधार के एक परिसर में हुई. इसके अलावा पाँच संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है. ये स्पष्ट नहीं है कि कि मारे गए लोग या हिरासत में लिए गए लोग उनमें शामिल हैं जो शुक्रवार को तालेबान के हमले के बाद जेल से भाग गए थे. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नैटो ने स्वीकार किया है कि अफ़ग़ानिस्तान के कंधार शहर की जेल से क़ैदियों को छुड़ा ले जाना तालेबान चरमपंथियों की रणनीतिक सफलता है. बीबीसी से बातचीत में अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के प्रवक्ता जनरल कार्लोस ब्रांको ने कहा कि ये एक अलग थलग घटना है और इससे ये निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि तालेबान मज़बूत हो रहे हैं अथवा अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति ख़राब हो रही है. नैटो का कहना है कि तालेबान चरमपंथी जेल पर हमला करके लगभग 1100 क़ैदियों को छुड़ा ले गए. इन क़ैदियों में से 400 तालेबान समर्थक थे. इस हमले में कई सुरक्षाकर्मियों की जानें गई हैं. जेल पर हमला अधिकारियों के अनुसार जेल के मुख्य द्वार को उड़ाने के लिए एक लॉरी बम से विस्फोट किया गया और फिर लगभग 40 तालेबान जेल के भीतर घुस आए और क़ैदियों को छुड़ा ले गए. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जेल का मुख्य दरवाज़ा तोड़ने के लिए जो विस्फोट किया गया वह इतना शक्तिशाली था कि तीन किलोमीटर दूर तक खिड़कियों के शीशे टूट गए थे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह ऐसी घटना है जो अफ़ग़ान पुलिस को भी चिंता में डालेगी और दूसरे सुरक्षा बलों को भी. कंधार उन चुनिंदा जगहों में से एक है जहाँ से राष्ट्रपति करज़ई, नैटो और अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे तालेबान के ख़िलाफ़ जंग लड़ी जा रही है. पिछले ही महीने कंधार जेल में क़ैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी और एक संसदीय दल के आश्वासन पर वह हड़ताल ख़त्म हुई थी. |
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