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'तालेबान को मिलते चीनी हथियार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन ने चीन से अनौपचारिक तौर पर शिकायत की है कि अफ़ग़ानिस्तान में चीन निर्मित हथियारों का इस्तेमाल ब्रिटिश सैनिकों के ख़िलाफ़ हो रहा है. बीबीसी को पता चला है कि हमलों के बाद कई अवसरों पर ब्रितानी और अमरीकी सेनाओं ने अफ़ग़ान विद्रोहियों से चीन निर्मित हथियार बरामद किए हैं. चीन अधिकारियों ने इस बात की जाँच कराने का वादा किया है. ये पहला अवसर है कि ब्रिटेन ने चीन से पूछा है कि उसके हथियार तालेबान तक कैसे पहुँच रहे हैं. बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के साथ हाल में हुई बैठक में ब्रितानी अधिकारियों ने अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया. जब इस बारे में पूछा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय ने जुलाई के बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि '' हथियारों का निर्यात हमारे क़ानून और अंतरराष्ट्रीय सहमति के आधार पर किया जाता है.'' दूसरी ओर तालेबान ने हाल में अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं और उनके पास अब ज्यादा आधुनिक हथियार हैं. अफ़गानिस्तान की चिंता अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने निजी तौर पर बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि तालेबान के पास अब आधुनिक चीनी हथियार हैं. वे कहते हैं कि इसमें विमानभेदी गन, रॉकेट से दागे जानेवाले ग्रेनेड और बारूदी सुरंगें शामिल हैं.
एक वरिष्ठ अफ़गा़न अधिकारी ने बीबीसी को बताया,'' हम जानते हैं कि चीन के एचएन-5 विमानभेदी मिसाइल तालेबान के पास हैं. हम चिंतित हैं कि तालेबान को ये कहाँ से मिल रहे हैं.'' उनका कहना था कि अधिकतर चीनी हथियारों से सीरियल नंबर और अन्य जानकारी हटा दी गई है और ये जानना बेहद मुश्किल है कि वे कहाँ से आए हैं. हालांकि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार चीन को मित्र मानती है लेकिन अधिकारी मानते हैं, चीन अमरीका की इस क्षेत्र में उपस्थिति से चिंतित है. दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में चीन निर्मित हथियार दशकों से उपलब्ध रहे हैं क्योंकि वे सबसे सस्ते होते हैं. ईरान की भूमिका इसके पहले तक तालेबान को हथियार पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई अथवा हथियारों के तस्करों से मिला करते थे. लेकिन इस बात की कम संभावना है कि आईएसआई उन्हें विमानभेदी मिसाइल या अन्य हथियार उपलब्ध कराएगी.
पाकिस्तान की सेना और अफ़ग़ान सीमा के क़बायली इलाक़ों में रहनेवाले चरमपंथियों के बीच संबंध बिगड़ गए हैं इसलिए तालेबान अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ भी कर सकते हैं. पाकिस्तान स्थित चरमपंथियों को हथियार देना चीन के भी हित में नहीं है. पिछले कुछ समय में चरमपंथियों ने पाकिस्तान स्थित चीनी कर्मचारियों को निशाना है. इसलिए पाकिस्तान के बजाए प्रेक्षक उंगली ईरान की ओर उंगली उठाते हैं. ईरानी गुप्तचर एजेंसी दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय रही है. ईरान अमरीका के परमाणु ठिकानों पर हमले की सूरत में अमरीकी फ़ौजों पर हमले की रणनीति बनाता रहा है. लेकिन 1998 से ईरान के शिया और तालेबान के सुन्नी आपस में दुश्मन रहे हैं. पर वक्त बदल गया है, अमरीका दोनों का शत्रु है और अमरीकी कमांडर इस बात को मानते हैं कि दोनों में रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. और यह ब्रिटेन और अमरीका दोनों के लिए चिंता की बात है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अलक़ायदा फिर हमला कर सकता है'17 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना अफ़ग़ानिस्तान को 'अतिरिक्त सहायता'26 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना मैहसूद ने अमरीकी क़ैद में गुज़ारे थे दिन24 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान कमांडर ने ख़ुद अपनी जान ली24 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस कोरियाई बंधक ने रिहाई की गुहार लगाई27 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस बंधकों पर बातचीत के लिए तालेबान राज़ी03 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस कंधार में आत्मघाती हमला, 15 मरे18 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान 'बंधकों को छोड़ने पर राज़ी'28 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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