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मैहसूद ने अमरीकी क़ैद में गुज़ारे थे दिन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस्लामी चरमपंथियों के कमांडर अब्दुल्लाह मैहसूद क्यूबा स्थित अमरीकी बंदी शिविर ग्वांतानामो बे में 25 महीने कैद़ रहे थे. उन्हें इसी वर्ष मार्च में रिहा किया गया था. अब्दुल्लाह मैहसूद का असली नाम नूर आलम था. उन्होंने पाकिस्तान के दक्षिणी वज़ीरिस्तान क्षेत्र से दो चीनी इंजीनियरों का अपहरण किया था. 33 वर्षीय मैहसूद ने अफ़ग़ानिस्तान में उत्तरी गठबंधन के ख़िलाफ़ तालेबान की तरफ़ से लड़ाई में भी हिस्सा लिया था. 1996 में काबुल पर तालेबान के कब्ज़े के कुछ ही दिन पहले एक बारुदी सुरंग के विस्फोट में वह अपनी एक टांग गँवा चुके थे. मैहसूद ने दिसंबर 2001 में उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के कुंदुज़ में उज़्बेक कमांडर जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम के नेतृत्व में सैकड़ों लड़ाकों के साथ समर्पण कर दिया. मैहसूद की पढ़ाई-लिखाई पेशावर के सरकारी कॉलेज में हुई. यहीं उनकी मुलाक़ात अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान सदस्यों से हुई और वे उनसे जुड़ गए. दुस्साहसी मैहसूद पश्तून थे और अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान भी इसी जाति के हैं. वह अफ़ग़ानिस्तान सीमा से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान में रहने वाले मैहसूद कबीले से संबंधित थे. लंबे वालों वाले मैहसूद दुस्साहसी प्रवृत्ति के थे. ग्वांनामो बे से छूटने के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका विरोधी लड़ाकों के बीच उनकी छवि एक नायक की थी. वे एक बड़े चरमपंथी कबायली कमांडर नेक मोहम्मद के साथी थे. नेक मोहम्मद इसी वर्ष जून में पाकिस्तान सेना के एक अभियान में मारे गए थे. पहाड़ियों में अपने साथी लड़ाकों से मिलने के लिए वो ऊँट या घोड़े की सवारी करते थे. अन्य मौकों पर उनकी सुरक्षा के लिए तालेबान लड़ाकों का चारों तरफ सख़्त पहरा होता था. मैहसूद ने बीबीसी के साथ हाल ही अपने इंटरव्यू में कहा था कि वह जोखिम उठाकर और मुश्किलों का सामना करते हुए अपने लड़ाकों के सामने मिसाल पेश करते हैं ताकि उनका जोश बना रहे. अमरीका की नीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी कब्ज़ा मुसलमानों को उकसाने की हरकत है और इसका बदला लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ नहीं लड़ना चाहते. उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की सरकार के विरुद्ध जिहाद की घोषणा की, क्योंकि उनका आरोप था कि मुशर्रफ़ क्षेत्र में अमरीकी नीतियों को लागू कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें तालेबान कमांडर ने ख़ुद अपनी जान ली24 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान ने 'अफ़ग़ान पत्रकार की हत्या की'08 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान ने लड़के से चाकू चलवाया21 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस पाक-अफ़ग़ान सीमा पर बाड़ लगाना जारी10 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'मुल्ला दादुल्ला का शव सौंपा गया'07 जून, 2007 | भारत और पड़ोस काबुल को निशाना बनाने की रणनीति21 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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