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राजशाही समाप्ति पर ख़ुशी, झड़पें भी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सदियों से चली आ रही राजशाही को समाप्त करने के संविधान सभा के फ़ैसले के बाद बहुत से लोग ख़ुशिया मना रहे हैं और राजधानी काठमाँडू में शुक्रवार को उनकी झड़पें पुलिस से भी हुई हैं. ये प्रदर्शनकारी शाही महल के पास प्रदर्शकर रहे थे जहाँ पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिसके फलस्वरूप झड़पें हुईं. प्रदर्शनकारियों ने राजा के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की, पुलिस पर पथराव किया और महल में भी घुसने की कोशिश की. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर लाठी चार्च किया जिसमें लगभग 25 लोग घायल हो गए. नेपाल की नई संविधान सभा ने गत बुधवार यानी 28 मई को एक प्रस्ताव पारित करके क़रीब ढाई सौ साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर दिया था और राजा को शाही निवास ख़ाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया था. कोई विकल्प नहीं गुरूवार शाम को एक भारी भीड़ ने पूर्व राजा की एक प्रतिमा पर नेपाल का झंडा लगाने की कोशिश और तभी से वहाँ झड़पें शुरू हो गईं. भीड़ में मौजूद लोग 'नेपाल ज़िंदाबाद' के नारे लगा रहे थे. वे लोग शाही महल की तरफ़ बढ़ रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक नेपाली नागरिक हेम लाल भंडारी के हवाले से कहा है, "जब तक ज्ञानेंद्र ख़ुद यह घोषणा नहीं करते कि उन्होंने शाही निवास छोड़ दिया है और जनादेश का सम्मान किया है तब तक लोग नाराज़ रहेंगे और प्रदर्शन करते रहेंगे." अधिकारियों ने कहा है कि गुरूवार को शाही महल में से राजशाही के प्रतीक को हटा दिया गया था. हाल में हुए संविधान सभा चुनावों में जीत हासिल करने वाले माओवादी विद्रोहियों की यह एक बड़ी माँग रही है. राजा ज्ञानेंद्र ने बुधवार को पारित प्रस्ताव पर अभी कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है. नेपाल के एक प्रमुख अख़बार ने लिखा है कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र अपना सामान बांध रहे हैं और शुक्रवार को शाही महल छोड़ देने की योजना है. नेपाल पर शाह राजशाही ने क़रीब 240 साल तक राज किया और बुधवार, 28 मई 2008 को सदियों पुरानी यह राजशाही समाप्त कर दी गई. संवाददाताओं का कहना है कि माओवादियों और अन्य राजनीतिक दलों में इस बात पर आम सहमति थी कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र देश में एक आम नागरिक के तौर पर रह सकते हैं. नेपाल के कुछ हिंदू समर्थक और राजशाही समर्थक लोग राजशाही समाप्त किए जाने और देश का एक हिंदू राष्ट्र का दर्जा समाप्त किए जाने का विरोध कर रहे हैं. |
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