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काठमांडू में रैलियों पर प्रतिबंध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने राजधानी काठमांडू में रैली और बैठकों के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया है. ये प्रतिबंध नेपाल की नई सरकार के देश को गणतंत्र घोषित करने के निर्णय के संबंध में बैठक करने से दो दिन पहले लगाया गया है. इस प्रतिबंध के तहत आने वाले क्षेत्रों में राजा ज्ञानेंद्र का महल, वह हॉल जहाँ सभासद बैठेंगे और प्रधानमंत्री का निवास स्थल शामिल हैं. इसका मकसद विरोध प्रदर्शनों को रोकना करना है. नेपाल में ऐतिहासिक बदलाव हुआ है. लेकिन अभी तक सरकार के बहुत कम संवैधानिक कार्य पूरे हो पाए हैं. माओवादी पार्टी जो पहले विद्रोहियों में गिनी जाती थी, उसके हिंसा में शामिल रहने के कारण लोगों में अब भी भय व्याप्त है. गणतंत्र की तैयारी पिछले महीने चुनी गई संविधान सभा सदियों पुराने राजतंत्र को ख़त्म कर गणतांत्रिक ढांचा लागू कर रही है.
अभी नई सरकार बनाने की प्रक्रिया चल ही रही है. अभी तक इस बात के भी संकेत नहीं मिले हैं कि राजा ज्ञानेंद्र अपने शाही महल से किसी और निवास में चले जाएंगे. लोगों का मानना है कि बुधवार को जब सभा पहली बार एक साथ बैठेगी तो गणतंत्र की घोषणा हो जाएगी. फिर भी किसी भी तरह के विद्रोह या महल की तोड़फोड़ की आशंका के डर से सरकार ने शाही महल, प्रधानमंत्री के निवास स्थल के आसपास रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और बैठकों पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार इन प्रतिबंधों को सुरक्षा बनाए रखने के लिए ज़रूरी बता रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें राजशाही ख़त्म करने की तारीख़ तय12 मई, 2008 | भारत और पड़ोस प्रचंड ने राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई24 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'निर्वासन में जाने की ख़बर बेबुनियाद'21 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'नेपाल नरेश जनादेश का सम्मान करें'19 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल नरेश को गद्दी छोड़ने का सुझाव16 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादी 106 सीटों पर जीते15 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादियों को भारी बढ़त13 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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