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पाक में चरमपंथियों से समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की सूबा सरहद सरकार ने तालेबान समर्थकों से एक समझौता किया है जिसके तहत सेनाएँ इस क्षेत्र से हट जाएँगीं. अधिकारियों का कहना है कि वे चरमपंथियों को स्वात घाटी में शरिया क़ानून लागू करने देंगे, इसके बदले में उन्होंने हमले और प्रशिक्षण शिविर बंद करने का वादा किया है. सूबा सरहद सरकार के वरिष्ठ मंत्री बशीर बिलोर ने बताया कि पेशावर में 15 सूत्री समझौता किया गया है. उन्होंने बताया कि चरमपंथी सुरक्षाबलों पर आत्मघाती और बम हमले बंद करने पर सहमत हो गए हैं. साथ ही उनसे उम्मीद की जाती है कि वो विदेशी चरमपंथियों को सौंप देंगे और लड़कियों की शिक्षा में बाधा नहीं डालेंगे. साथ ही सरकार क़ैदियों को भी छोड़ेगी और स्वात घाटी से धीरे धीरे सेना को हटाएगी. उनका कहना था कि इस समझौते से इलाक़े में शांति कायम करने में मदद मिलेगी. अमरीका की चिंता पाकिस्तान में नई सरकार गठन के बाद ये पहला समझौता है. अमरीकी विदेश उपमंत्री जॉन नेग्रोपॉन्टे ने मंगलवार को कहा कि अमरीका ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि चरमपंथियों के साथ समझौता न किया जाए. अमरीका का मानना है कि ऐसे समझौतों से अल क़ायदा और तालेबान को मदद मिलेगी. पाकिस्तान ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान में अप्रैल, 2004 और उत्तरी वज़ीरिस्तान में सितंबर, 2006 में भी ऐसा ही समझौता किया था. ये समझौता पाकिस्तानी सेना और चरमपंथियों के बीच जारी हिंसा को ख़त्म करने के लिए किया गया था. अमरीकी का कहना था कि समझौते के बाद पाकिस्तानी सीमा से लगे अफ़ग़ान इलाक़ों में हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं. माना जाता है कि पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान से लगे सीमावर्ती क़बायली इलाक़े में ही अल क़ायदा के प्रमुख नेता छिपे हुए हैं. |
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