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सोमवार, 19 मई, 2008 को 11:54 GMT तक के समाचार
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बांग्लादेशियों की धरपकड़ शुरु

बांग्लादेशी मज़दूर
बांग्लादेशी मज़दूरों का आरोप है कि उन्हें परेशान किया जा रहा है
राजस्थान की राजधानी जयपुर मे हुए बम धमाकों में कथित तौर पर बांग्लादेश के एक गुट का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने राज्य भर में बांग्लादेशी नागरिकों की धरपकड़ शुरु कर दी है.

हालांकि राज्य मे कितने बांग्लादेशी है इसे लेकर ख़ुद भारतीय जनता पार्टी सरकार भ्रम में है.

कांग्रेस विधायक डॉक्टर चन्द्रशेखर बेद आंकड़ो का हवाला देकर कहते हैं, "बीजेपी सरकार जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नही कर पाई. क्योंकि इस सरकार के पास इच्छाशक्ति है ही नही."

वामपंथी संगठन कह रहे हैं कि अगर बांग्ला जुबान बोलने वाले भारतीयों को निशाना बनाया गया तो वो विरोध करेंगे.

पुलिस धरपकड़ मे अब तक क़रीब 12 बांग्लादेशियों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से आठ को अजमेर मे गिरफ़्तार किया गया है.

 ''यहाँ पश्चिम बंगाल से ग़रीब मज़दूर सोने-चांदी और जवाहरात का काम करने आते रहे है. ऐसे लोगों को बांग्लादेशी बता कर अगर सताया गया तो हम इसे सहन नही करेंगे. क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका है.
वामपंथी नेता वकार उल अहद

पुलिस के अनुसार राज्य भर मे बांग्लादेशियों की जाँच का अभियान चलाया जा रहा है जो एक महीने तक चलेगा.

राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौर के मुताबिक जयपुर में पहले सर्वेक्षण मे बांग्लादेशियों की तादाद ढाई हज़ार पाई गई थी लेकिन अब इनकी संख्या दस हज़ार से कम नही है.

उधर, डेढ़ साल पहले गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी में अपने भाषण मे कहा था कि राजस्थान में पचास हज़ार बांग्लादेशी रह रहे है.

लेकिन दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक बेद ने सरकार से सवाल पूछा तो जवाब आया कि जयपुर शहर में 916 और ग्रामीण जयपुर मे 345 बांग्लादेशी हैं. भरतपुर मे आठ बांग्लादेशी रह रहे हैं.

सरकार ने माना कि इनमें से कुछ बांग्लादेशियों को राशन कार्ड मिल चुके है, कुछ का नाम मतदाता सूची में शामिल हो चुका है और कुछ ऐसे भी हैं जो ड्राइविंग लाइसेंस ले चुके है.

ये तथ्य सामने आने बाद भी सरकार इन दस्तावेज़ों को ख़ारिज नहीं कर सकी है.

अदालत की टिप्पणी

पिछले वर्ष जयपुर की एक अदालत ने बांग्लादेशियों के बारे में सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी.

अदालत ने कहा की सरकार ऐसे गंभीर मामले पर ध्यान नही दे रही है. अदालत ने मुख्य सचिव को भी इस बारे मे सूचित किया था.

विपक्ष के विधायक बेद कहते हैं, "इन प्रमाणों से साफ़ है की सरकार ऐसे ज्वलंत मुद्दों के लिए समय नही निकल पा रही है और बांग्लादेशियों पर उसकी चिल्ल-पो महज सियासी है."

वामपंथी नेता वक़ार उल अहद ने बीबीसी से कहा, "बांग्लादेशी क्या किसी भी विदेशी को हमारी सर जमीं पर रहने का हक़ नही है. आख़िर बांग्लादेशी यहाँ तक कैसे चले आते है."

 बीजेपी सरकार जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नही कर पाई. क्योंकि इस सरकार के पास इच्छाशक्ति है ही नही
कांग्रेस के विधायक, चंद्रशेखर बेद

लेकिन वक़ार ये भी कहते हैं कि यदि बांग्ला भाषा बोलने वाले पश्चिम बंगाल के लोगों को निशाना बनाया तो वे विरोध करेंगे.

वे कहते हैं, ''यहाँ पश्चिम बंगाल से ग़रीब मज़दूर सोने-चांदी और जवाहरात का काम करने आते रहे है. ऐसे लोगों को बांग्लादेशी बता कर अगर सताया गया तो हम इसे सहन नही करेंगे. क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका है."

संसदीय कार्य मंत्री राठौर कहते हैं, "इनमें से ज्यादातर बांग्लादेशी अपना पता-ठिकाना पश्चिम बंगाल के कूच बिहार और चौबीस परगना जैसे ज़िलों का बताते है. लेकिन हम इनकी गहराई से जाँच करेंगे. पुलिस को जाँच का काम एक महीने मे पूरा करने को कहा गया है."

उधर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनो ने बांग्लादेशियों के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाने का ऐलान किया है.

बहरहाल बांग्लादेशी नागरिकों का मुद्दा सरकार के गले की फांस बन गया है.

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