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भाजपा ने प्रधानमंत्री पर सवाल उठाए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि वह ऐसे अपराधों की जांच पड़ताल के लिए एक केंद्रीय एजेंसी बनाए जाने के प्रधानमंत्री के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है बशर्ते केंद्र सरकार पोटा जैसा क़ानून बनाने की इच्छुक हो. भाजपा के महासचिव अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते पर लेते हुए कहा कि आतंकवाद से लड़ाई का उनका रिकॉर्ड काफ़ी खराब है और अब सरकार जाने के समय वो संघीय जांच एजेंसी का सुझाव दे रहे हैं जबकि उन्हें पहले पोटा को वापस लाना चाहिए. उनका कहना था कि मनमोहन सिंह के बयान से सिर्फ़ एक बात साबित होती है कि चार साल के बाद प्रधानमंत्री ने आख़िरकार माना कि आतंकवाद से लड़ने के लिए व्यापक नेटवर्क की ज़रूरत है. जेटली का आरोप था कि केंद्र सरकार जानबूझकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में संगठित अपराधों के ख़िलाफ़ क़ानून की राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं दिला रही है जबकि ऐसे क़ानून महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में मौजूद हैं. भाजपा महासचिव का कहना था कि इस भेदभाव का नतीजा ये होगा कि मुंबई की ट्रेनों में हुए धमाकों और मालेगांव विस्फोट की जाँच तो चरमपंथियों के लिए विशेष रूप से बनाए गए क़ानून मकोका के तहत होगी. जबकि जयपुर धमाकों के बाद हिरासत में लिए गए लोगों की जांच सामान्य क़ानून के तहत होगी. इससे अपराधियों को ज़मानत मिलने की संभावना है. ग़ौरतलब है कि जयपुर में धमाकों के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद से जुड़े सभी मामलों की जाँच के लिए एक केंद्रीय एजेंसी बनाने की बात कही थी. |
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