|
शरणार्थियों को लेकर पाक की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान की वर्ष 2009 तक लाखों अफ़ग़ान शरणार्थियों को वापस भेजने की योजना की आलोचना की है और इसमें संशोधन करने को कहा है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ये योजना उचित नहीं है. दरअसल पिछले कई दशकों से बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थी हिंसा के डर से सीमा लांघ कर पाकिस्तान आते रहे हैं. इनमें से लगभग 20 लाख लोग वापस नहीं गए हैं और पाकिस्तान में ही रह रहे हैं. हाल में नैटो सेनाओं और तालेबान के संघर्ष की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के बहुत से लोग पाकिस्तान चले आए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में नई सरकार ने सत्ता संभाले ली है और अब वक्त आ गया है कि ये लोग वापस जाएँ. लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अधिकांश शरणार्थी वापस नहीं जाना चाहते हैं. उनका मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान में बहुत कम सेवाएँ उपलब्ध हैं और विकास के मामले में भी वह पिछड़ा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इनमें से बहुत से लोग अफ़ग़ानिस्तान वापस तो चले जाएँगे लेकिन इनमें से कुछ तालेबान लड़ाकों में शामिल हो जाएँगे. हालांकि पाकिस्तान का भी मानना है कि सन् 2009 की समयसीमा पर अमल मुश्किल है. लेकिन उसका कहना है कि शरणार्थी अनिश्चितकाल तक उसकी ज़िम्मेदारी नहीं हो सकते हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान बंद कर रहा है शरणार्थी शिविर07 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस पीढ़ी दर पीढ़ी शरणार्थी रहने की मजबूरी23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस चार शरणार्थी शिविर अगस्त तक बंद होंगे08 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ान पुनर्निर्माण सहायता तेज़ हो'17 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में मुहाजिरों का दर्द01 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस लाखों अफ़ग़ानियों का पंजीकरण हुआ05 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस संयुक्त राष्ट्र कार्यकर्ता वापस बुलाए गए19 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||