BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 19 मार्च, 2008 को 21:58 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
आडवाणी की आत्मकथा का विमोचन

लालकृष्ण आडवाणी
आडवाणी की इस आत्मकथा के प्रकाशन के समय को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं
'माई कंट्री-माई लाइफ़' यानी 'मेरा देश-मेरा जीवन' भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा है.

इस आत्मकथा का विमोचन बुधवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने दिल्ली में किया.

समारोह का समाँ किसी भी अवार्ड फंक्शन से कम नहीं था. चाहे उद्योग जगत से अनिल अंबानी हों या फ़िल्मी दुनिया से संजय दत्त और सोनू निगम या फिर चो रामास्वामी जैसे मीडिया के दिग्गज.

बड़े लोगों की इस समारोह में कोई कमी नहीं थी.

भाजपा के भी लगभग सभी वरिष्ठ नेता इस विमोचन समारोह में मौजूद थे. फिर वो चाहे वरिष्ठ पीढ़ी के जसवंत सिंह, भैरव सिंह शेखावत और मुरली मनोहर जोशी हों या फिर नई पीढ़ी के नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह. सभी ने इस विमोचन के लिए समय निकला.

इसके अलावा एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस, आरएसएस के मोहन भगवत और एनसीपी के शरद पवार भी इस समारोह में नज़र आए.

महत्वपूर्ण

इस किताब में लालकृष्ण आडवाणी ने भारत की पिछले 60 सालों की राजनीति के कई महत्वपूर्ण मोड़ और अहम् घटनाओं का उल्लेख किया है.

जिसमें भारत का विभाजन, इमरजेंसी और भाजपा की रथ यात्रा शामिल है.

आडवाणी ने इस पुस्तक में बाबरी मस्जिद और 2002 के गुजरात दंगों जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर भी लिखा है.

 आज की राजनीति में मुझे लगता है कि आडवाणी जी को ग़लत ढंग से समझा और प्रस्तुत किया गया है. अपने व्यक्तिगत अनुभव से मैं कह सकता हूँ कि वे वास्तविकता में अपनी इस छवि से बहुत अलग हैं
जसवंत सिंह

इस समारोह में जसवंत सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आडवाणी को कई मायनों में ग़लत समझा जाता है.

उन्होंने कहा, "आज की राजनीति में मुझे लगता है कि आडवाणी जी को ग़लत ढंग से समझा और प्रस्तुत किया गया है. अपने व्यक्तिगत अनुभव से मैं कह सकता हूँ कि वे वास्तविकता में अपनी इस छवि से बहुत अलग हैं."

इस मौक़े पर आडवाणी ने अपने निजी परिवार और अपने वैचारिक परिवार आरएसएस को अपने जीवन में सार्थकता और संतुष्टि का स्रोत बताया.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थे लेकिन आडवाणी ने उनके प्रति भी अपना आभार प्रकट किया.

और फिर अंत में कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि एपीजे अब्दुल कलाम ने आडवाणी को एक रचनात्मक नेता बताते हुए किताब के बारे में कहा, "अटल बिहारी वाजपेयी ने इस किताब की भूमिका में जो लिखा है, मैं उससे सहमत हूँ कि एक संवेदनशील मनुष्य और एक बड़े नेता के जीवन का सबसे अच्छा समय अभी आना बचा हुआ है."

भारत के बहुत ही कम नेता हैं जिन्होंने सक्रिय राजनीति में रहते हुए अपनी आत्मकथा लिखी है. आडवाणी उनमें से एक हो गए हैं.

लेकिन इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि जब अगले साल होने वाले आम चुनावों के बादल अभी से मंडराने लगे हैं तब कहीं-न-कहीं इस किताब के विमोचन का समय देश के राजनीतिक वातावरण को देखकर किया गया है.

कारण चाहे जो हो, लालकृष्ण आडवाणी की जो भूमिका देश की राजनीति में रही है उस संदर्भ में यह किताब शायद देश की कई ऐतिहासिक घटनाओं पर नई रोशनी डाल सकती है.

लाल कृष्ण आडवानी (फ़ाइल फ़ोटो)आडवाणी की 'ताजपोशी'
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की नई पारी पर रेणु अगाल की विवेचना.
आडवाणीआडवाणी-एक मुलाकात
राजनीति से दूर, जीवन के अनकहे पहलुओं पर आडवाणी का इंटरव्यू.
लालकृष्ण आडवाणीआडवाणीः एक परिचय
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के जीवन के अहम पड़ावों पर एक नज़र..
इससे जुड़ी ख़बरें
चुनाव के लिए कमर कसने की अपील
29 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस
'गुजरात चुनाव राजनीति में मुख्य मोड़'
23 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
'मनमोहन सिंह सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री'
13 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>