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'संन्यास' लेना चाहते हैं वाजपेयी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य की मानें तो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की इच्छा जताई है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के चौथे चरण में चुनाव प्रचार कर चुके वाजपेयी ने पार्टीजनों के समक्ष इच्छा जताई है कि उन्हें अब सक्रिय राजनीति से अलग होने दिया जाए. पांचजन्य में छपे एक संपादकीय के अनुसार उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार से पहले वाजपेयी ने कहा ' अब बहुत हो गया. मुझे जाने दिया जाए. सक्रिय राजनीति से मुक्त किया जाए. ' पत्रिका के अनुसार वाजपेयी बड़ी मान मनौवल के बाद उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए राज़ी हुए थे और तबीयत ख़राब होने के कारण वो लखनऊ में वोट डालने भी नहीं जा सके. पांचजन्य ने वाजपेयी को 'प्रज्ञ पुरुष ' क़रार दिया है और कहा है कि उत्तर प्रदेश में उनकी मौजूदगी एक महती ज़रुरत थी. उल्लेखनीय है कि संघ के प्रमुख के एस सुदर्शन ने दो साल पहले कहा था कि वाजपेयी और आडवाणी को राजनीति से संन्यास लेना चाहिए ताकि युवा नेता आगे आ सकें. सुर्दशन के इस बयान के कुछ ही दिनों बाद वाजपेयी ने मुंबई में पार्टी के रजत जयंती समारोह के दौरान संन्यास लेने की इच्छा जताई थी. लेकिन उसके बाद भी सक्रिय राजनीति में बने रहे. इस समारोह मे वाजपेयी ने आडवाणी और प्रमोद महाजन को राम लक्ष्मण करार दिया था. हालांकि इस बार पांचजन्य के संपादकीय में सच्चाई इसलिए देखी जा रही है क्योंकि वाजपेयी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे हैं और राजनीति में उनकी सक्रियता बेहद कम हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें भाजपा: मुख्य पड़ाव14 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'सत्ता की राजनीति' नहीं करेंगे वाजपेयी29 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'पार्टी के हिसाब से चलेंगे वाजपेयी'30 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आसान नहीं है राजनाथ की डगर31 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस देहरादून में आगे की राह तलाशती भाजपा07 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस वाजपेयी के बिना भाजपा का प्रचार23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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