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चुनाव के लिए कमर कसने की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के अंतिम दिन दिल्ली में पार्टी के नेताओं के भाषणों का निचोड़ देखें तो पार्टी इस साल को चुनावी साल के तौर पर देख रही है जिसमें नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले साल संसदीय चुनाव. भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इन चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं से कमर कसने का आहवान करते हुए पार्टी की रणनीति और एजेंडा सामने रखा. यह पहला मौका है जब पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के वरिष्ठतम नेता अटल बिहारी वाजपेयी ख़राब स्वास्थ्य की वज़ह से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हो पाए. इस बैठक में लगभग सभी नेताओं ने प्रमुखता से जिस बात का ज़िक्र किया वो थी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ग़ैरमौजूदगी. वाजपेयी ख़राब स्वास्थ्य की वजह से परिषद में भाग नहीं ले पाए लेकिन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि उनका संदेश यही है कि पार्टी लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में चुनाव लड़े और उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाए. लालकृष्ण आडवाणी ने चुनाव में भाजपा की जीत की आशा व्यक्त करते हुए जिन मुद्दों का प्रमुखता से ज़िक्र किया उनसे लगता है कि गुजरात में पार्टी की भारी जीत के बाद पार्टी सॉफ़्ट हिंदुत्व के मंत्र पर ही चुनावों में उतरेगी. कांग्रेस को निशाना बनाते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जहाँ कांग्रेस पचास सालों के शासन के दौरान लाखों गांवों में पीने का पानी और बिजली तक पहुंचाने में विफल रही है वहीं आतंकवाद से निपटने में भी उसने ढुलमुल रवैया अपनाया है. संसद पर 2002 में हमले के मामले में दोषी क़रार दिए गए अफ़ज़ल गुरू के बारे में नरेंद्र मोदी की ही तरह लालकृष्ण आडवाणी ने भी सवाल उठाया कि सरकार अफ़ज़ल गुरू को फाँसी देने से इतने लंबे अरसे से क्यों बच रही है. आडवाणी ने कहा, "अफ़ज़ल गुरू को फाँसी क्यों नहीं दी. कोर्ट ने कह दिया फिर भी नहीं दी. ये छोटी बात नहीं है. मैं आज भी गृह मंत्री से पूछता हूँ - कहाँ है वो 'क्लिमेंसी अपील'. उसका फ़ैसला क्यों नहीं करते हो?" सॉफ़्ट हिंदुत्व आडवाणी ने एक तरफ़ तो कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने के आरोप लगाया कि मुसलमानों की बदतर आर्थिक स्थिति के लिए ख़ुद कांग्रेस ज़िम्मेदार है, वहीं लालकृष्ण आडवाणी ने देश में आर्थिक सुधारों और कई ढांचागत परियोजनाओं की शुरुआत का श्रेय वाजपेयी सरकार को दिया. कार्यकर्ताओं से चुनावों के लिए कमर कसने का आहवान करते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी विश्वास के साथ चुनाव में उतरे लेकिन अति विश्वास से बचे. उनका कहना था कि सही उम्मीदवारों के चयन के लिए पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ मंडल स्तर पर भी चुनाव प्रबंधन समितियों का गठन करने का फ़ैसला किया है. सभी नेताओं का दावा था कि भारतीय जनता पार्टी गुजरात की सफलता को राजस्थान और मध्यप्रदेश में दोहरा कर साबित करेगी की सत्ता विरोधी लहर उसे प्रभावित नहीं करेगी. जहां तक सॉफ़्ट हिंदुत्व के मुद्दे की बात है यह तो समय ही बताएगा कि ज़मीन पर वो कितना सौम्य या प्रखर रूप में अवतरित होगा. इस बारे में बीबीसी हिंदी के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का कहना है, "बीजेपी की इस बैठक में पार्टी ने यह संकेत भी देने की कोशिश की है कि लोकसभा चुनावों कि चुनौती से निबटने के लिए पार्टी एकजुट है और उनके अपने घर में कोई विभाजन नहीं है". "पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के शायद इस समय सबसे लोकप्रिय और अगले शीर्ष नेता की तरह देखे जाने वाले नरेंद्र मोदी...दोनों ने ही आडवाणी के स्तुतीगान में कोई कसर नहीं छोड़ी और मुक्त भाव से जैसे उनका नेतृत्व औ प्रधानमंत्री पद कि उम्मीदवारी स्वीकार की". "बैठक के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं दोनों कि ही बॉडी लैंग्वेज सकारात्मक और आशावादी दिखी. कुछ हफ़्ते पहले तक पार्टी में माहौल काफ़ी सुस्त और निराशावादी था पर गुजरात कि जीत के बाद फिर दिल्ली में जीत की संभावना दिखने लगी हैं". "एक बात और तय लग रही है . अगले चुनावों में बीजेपी के पोस्टर बॉय आडवाणी के साथ-साथ नरेंद्र मोदी भी रहेंगे और पार्टी के चुनावी प्रचार कि धुरी विकास और हिंदुत्व के मुद्दे रहेंगे". | इससे जुड़ी ख़बरें ख़त से गर्म हुआ अटकलों का बाज़ार21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आडवाणी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार होंगे10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आडवाणी कैसे निभाएँगे नई ज़िम्मेदारी?15 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'यूपीए सरकार जनसमर्थन खो चुकी है'27 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस लालकृष्ण आडवाणीः एक संक्षिप्त परिचय10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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