|
ख़त से गर्म हुआ अटकलों का बाज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल में शुक्रवार से शुरू हुई पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी भले न पहुँच पाए हों लेकिन कार्यकर्ताओं के नाम आई उनकी चिट्ठी ने अटकलों का बाज़ार ज़रूर गर्म कर दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने एक पन्ने का ख़त भेजा है जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से बैठक में न आ पाने पर खेद जताया है. इसके अलावा उन्होंने इस ख़त में पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों को राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों की याद दिलाई और 'सामूहिक चिंतन' कर आगे बढ़ने के साथ ही 'एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने' की बात भी कही है. लेकिन जो अटकलें लग रही हैं और जो सवाल पूछे जा रहे हैं, वे इस मुद्दे पर नहीं हैं. सारी माथापच्ची ख़त की आखिरी चार पंक्तियों पर हो रही है. संदेश से अटकलें इन आख़िरी चार पंक्तियों में कवि-हृदय वाजपेयी ने अपनी एक कविता की कुछ पंक्तियां दोहराई हैं. जिसमें छिपे 'गूढ़ अर्थ' को खंगाला जा रहा है. वाजपेयी ने लिखा.. "आहुति बाक़ी, यज्ञ अधूरा शुक्रवार को जैसे ही भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद पत्रकार सम्मेलन में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के भाषण का ब्यौरा देने आए तो उन पर वाजपेयी के ख़त के मज़मून को लेकर कई सवाल दाग़ दिए गए. पूछा गया कि 'सामूहिक चिंतन' और 'एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने' की बात कहीं पार्टी के अंतर्कलह को ध्यान में रखकर तो नहीं लिखी गईं. यह भी पूछा गया कि 'अपनों के विघ्नों ने घेरा' का इशारा कहीं पार्टी के उन सहयोगियों की ओर तो नहीं जो प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर उनको घेरने की कोशिश कर रहे हैं.
'पुरानी कविता' फिर यह भी पूछा गया कि आख़िर वह कौन है जो 'वज्र बनाने के लिए हड्डियाँ गलाने की तैयारी में है.' लेकिन भाजपा प्रवक्ता को इस पर हंसने या फिर इन पंक्तियों को पुरानी कविता की लाइनें बताने के अलावा कोई जवाब नहीं सूझा. हालांकि लाख टके का सवाल यह था कि वाजपेयी जी ने तो अनेक कविताएँ लिखीं, तो फिर इन चार पंक्तियों को ही संदेश के साथ क्यों भेजा गया. इस तीन दिवसीय इस बैठक के पहले दिन सेतुसमुद्रम या 'रामसेतु' के मामले, लोकसभा और आने वाले महीनों में कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति पर भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा होनी है. लोकसभा चुनाव में पार्टी किसको प्रधानमंत्री का दावेदार बनाएगी, इसको लेकर रस्साकशी जारी है. लोकसभा में विपक्ष के नेता आडवाणी ने कुछ दिनों पहले यह कहकर कि ब्रिटेन में चुनाव में विपक्षी पार्टी के विजयी होने की सूरत में विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री बनाए जाने की परंपरा है, इस मामले में पहल कर दी है. लेकिन पार्टी के अंदर ही इस बात पर काफ़ी मतभेद के स्वर सुनाई दे रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'रामसेतु' पर प्रस्ताव पारित करेगी भाजपा21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'रामसेतु' का हलफ़नामा वापस14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस हलफ़नामा वापस लेने का फ़ैसला13 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सेतु समुद्रम के विरोध में चक्का जाम12 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर संसद में हंगामा20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस आडवाणी ने कारत से की बात14 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'सेतु होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं'12 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस राज्यसभा में परमाणु समझौते पर चर्चा 05 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||