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प्रधानमंत्री राजनीति नहीं समझते: आडवाणी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के आख़िरी दिन विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि 'प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजनीति को नहीं समझते.' हाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर कहा था कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते कद से डरा हुआ है इसीलिए ये कदम उठाया गया है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा था कि इसलिए पार्टी ने गुजरात में मतदान से ठीक पहले आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है. उधर कांग्रेस ने भाजपा पर चरमपंथ पर नरम रवैया अपनाने के आरोप लगाए हैं और कंधार जाकर कथित चरमपंथी मसूद अज़हर को रिहा करने को भारत के इतिहास में 'काला दिवस' बताया है. दोनो पार्टियों के बीच 'विज्ञापन युद्ध' भी छिड़ा हुआ है और दोनो पक्ष अख़बारों में जमकर विज्ञापन भी दे रहे हैं. 'मोदी को नहीं पछाड़ सकते' समाचार एजेंसियों के अनुसार जब अहमदाबाद में आडवाणी से पत्रकारों ने इस बारे में पूछा गया तो आडवाणी का कहना था, "मैं केवल इतना कहना चाहूँगा कि प्रधानमंत्री कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं क्योंकि कोई राजनीतिक तौर पर सचेत व्यक्ति ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकता." उनका कहना था, "मुझे ख़ुशी है कि मनमोहन सिंह ने अपने बयान से ये तो मान ही लिया है कि गुजरात में मोदी को पछाड़ा नहीं जा सकता." आडवाणी का ये भी कहना था कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगी की वामदलों के दबाव के चलते सरकार भारत-अमरीका परमाणु समझौते तो पूरी तरह से छोड़ दे. उनका आरोप था, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का अब बुरा दौर शुरु हो गया है क्योंकि यूपीए के सहयोगी दल नहीं चाहते कि जल्द चुनाव हों. यदि प्रधानमंत्री भारत-अमरीका परमाणु संधि पर वामदलों की बात मानते हैं तो उनकी छवि धूमिल होती है. यदि वे वामदलों की बात नहीं मानते तो संभावना है कि सरकार ही गिर जाएगी." कांग्रेस का विज्ञापन अभियान कांग्रेस के विज्ञापन में कहा गया है - "क्या वह काला दिन याद है जब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्री चरमपंथी मसूद अज़हर को फाँसी देने की जगह उन्हें रिहा करने कंधार पहुँचे थे." उधर भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार में संसद पर हमले के मामले में दोषी ठहराए गए अफ़ज़ल गुरु को फाँसी देने के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की जमकर आलोचना की है. उधर कांग्रेस के ताज़ा विज्ञापन में आडवाणी की पाकिस्तान यात्रा और वहाँ मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार पर जाने की भी आलोचना की गई है. उधर आडवाणी का कहना था, "कांग्रेस का चुनाव प्रचार मुझे 1967 की विपक्ष के इंदिरा हटाओ अभियान की याद दिलाता है. इंदिरा गांधी ने जवाबी नारा दिया - ग़रीबी हटाओ और वे जीत गईं. आज गुजरात में नारे लगाए जा रहे हैं - मोदी हटाओ, और हमारा जवाब है गुजरात जिताओ." उनका कहना था कि किसी भी नेता के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत आरोपों का उलटा असर होगा. उनका दावा था कि कांग्रेस ने गुजरात में ग़लती की है और ये गुजरात में भाजपा की विजय का एक कारण होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें मतदाताओं को लुभाने की आख़िरी कोशिश14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आडवाणी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार होंगे10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस गुजरात विधानसभा चुनाव11 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री ने मोदी को आड़े हाथों लिया07 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'पहले चरण में भाजपा को नुक़सान'12 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'कांग्रेस-भाजपा कुआँ और खाई की तरह'12 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस लालकृष्ण आडवाणीः एक संक्षिप्त परिचय10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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