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चुनाव बाद पाक संसद की पहली बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ समर्थित दलों की आम चुनावों में हार के बाद नेशनल असेंबली की पहली बैठक सोमवार को हुई. इस दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई. नेशनल असेंबली की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले बेनज़ीर भुट्टो को श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी दर्शकदीर्घा में मौजूद थे. इसी सत्र के दौरान नए प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा की जानी है. मुशर्रफ़ का विरोध करने वाली पार्टियां चुनाव में अकेले बहुमत न मिलने के कारण गठबंधन सरकार बनाने पर सहमत हो गई हैं. पाकिस्तान में 18 फ़रवरी को हुए चुनावों में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के समर्थक दलों को ज़बर्दस्त झटका लगा था और उससे ख़ुद मुशर्रफ़ की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) प्रधानमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा करेगी. पीपीपी ने नेशनल असेंबली की सबसे अधिक सीटें जीती हैं और सरकार बनाने के लिए उसने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ गठजोड़ किया है. न्यायाधीशों का सवाल इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे इन दोनों दलों के बीच गठबंधन सुप्रीम कोर्ट के बर्ख़ास्त न्यायाधीशों की बहाली पर निर्भर करता है.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में आपातकाल लगाने के दौरान इन न्यायाधीशों को उनके पद से हटा दिया था. संवाददाता का कहना है कि मुशर्रफ़ को इस बात का भय था कि न्यायाधीश उन्हें राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर देंगे. उन्होंने इरादा जता दिया है कि वे इन न्यायाधीशों की बहाली का विरोध करेंगे. पीएमएल (नवाज़) के अध्यक्ष ने बीबीसी को बताया कि पीपीपी ने प्रधानमंत्री पद का अपना उम्मीदवार चुन लिया है लेकिन उन्होंने उम्मीदवार का नाम बताने से इनकार कर दिया. बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी तकनीकी रूप से प्रधानमंत्री बनने के योग्य नहीं हैं लेकिन देश में उनका प्रभाव है. सत्ता की साझेदारी के लिए जो समझौता हुआ है उसके मुताबिक़ नई सरकार बर्ख़ास्त न्यायाधीशों को बहाल करेगी, पीएमएल (नवाज़) की यह मुख्य माँग रही है. बदले में पीएमएल (नवाज़) नई सरकार में अपने नेताओं को मंत्री के रूप में शामिल कराने के लिए तैयार हो गई है. दो बड़ी और कुछ छोटी पार्टियों का यह गठबंधन सरकार तो बना सकता है लेकिन राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को उनके पद से हटाने के लिए ज़रूरी दो तिहाई बहुमत इनके पास नहीं है. गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती की चेतावनी दी है लेकिन वे इसे कैसे लागू करेंगे, यह स्पष्ट नहीं है. नई सरकार के सामने इस्लामी चरमपंथियों से निबटना सबसे बड़ी चुनौती है. चरमपंथियों के बम हमले पिछले कुछ हफ़्तों में कई लोगों की जान ले चुके हैं. |
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