|
प्रधानमंत्री पद को लेकर पीपीपी में मतभेद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ओर पाकिस्तान में सरकार गठन का रास्ता साफ़ होता दिख रहा है तो दूसरी ओर सबसे बड़े दल में प्रधानमंत्री पद को लेकर मतभेद भी सामने आते जा रहे हैं. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फ़हीम का कहना है कि वो अभी भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं. उनके नाम पर पिछले दिनों पार्टी के भीतर सहमति बनने के आसार भी नज़र आने लगे थे पर इसको झटका तब लगा जब पार्टी के कार्यवाहक प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति अली आसिफ़ ज़रदारी का नाम भी प्रधानमंत्री पद के लिए पात्र घोषित किया जाने लगा. पीपीपी के महासचिव जहाँगीर बदर ने अपने एक बयान में कहा है कि देश का प्रधानमंत्री आसिफ़ अली ज़रदारी को ही बनना चाहिए. उधर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमएलएन ने भी अमीन फ़हीम के नाम पर अपनी आपत्ति जाहिर की है. पिछले सप्ताह ही पीपीपी और पीएमएलएन के बीच पाकिस्तान में सरकार गठन के लिए एक समझौता हुआ था. पाकिस्तान में पिछले ही महीने आम चुनाव संपन्न हुए थे पर किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. हालांकि दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी, पीपीपी इस चुनाव में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी. सत्ता के समीकरण सत्ता गठन के लिए चुनाव में दूसरे नंबर पर रही नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पीएमएलएन ने पिछले सप्ताह पीपीपी के साथ एक समझौता किया ताकि देश में एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार का गठन किया जा सके.
माना जा रहा था कि नई सरकार की ज़िम्मेदारी पीपीपी के वरिष्ठ नेता मख़दूम अमीन फ़हीम को सौंप दी जाएगी पर पिछले दो दिनों से आ रहे बयानों से साफ़ दिखाई देने लगा है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर ही खींचतान शुरू हो गई है. अब स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर फ़हीम और ज़रदारी के बीच मतभेद खुलकर सामने आता जा रहा है. जहाँ एक ओर ज़रदारी समेत पार्टी के कई बड़े नेता राजधानी इस्लामाबाद में नई सरकार के गठन की रणनीति पर बातचीत कर रहे हैं वहीं फ़हीम ऐसे समय में पार्टी के नेताओं के साथ न होकर कराची में बने हुए हैं. इस पूरे मामले को पीएमएलएन के एक नेता ने यह कहकर और तूल दे दिया कि फ़हीम की भूमिका पिछले दिनों विवादित रही है और वो कई नाज़ुक, जटिल मौकों पर भी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मिलते रहे हैं. इस बयान पर फ़हीम ने कड़ी आपत्ति जताई है और इस बात को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि बेनज़ीर की हत्या के बाद उन्होंने राष्ट्रपति से कोई मुलाक़ात नहीं की है. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान: गठबंधन सरकार पर समझौता09 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ विरोधी गठबंधन और मज़बूत07 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'पीएम का फ़ैसला करने की लिमिट नहीं'06 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस ज़रदारी भ्रष्टाचार के पाँच आरोपों से बरी05 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस जो बीत चुका, उसे पीछे छोड़ें: मनमोहन05 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर' बाद में सुलझा लेंगे: ज़रदारी01 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||