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'पुणे में भीड़ ने मेरे हाथ काट डाले' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार से पुणे जाकर चना बेचने वाले किशन सिंह की दुख भरी कहानी सुनने के लिए महाराष्ट्र पुलिस की एक विशेष टीम सिवान पहुँची है. केंद्रीय गृहमंत्री के निर्देश पर महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों का एक जाँच दल बिहार के किशन सिंह का बयान दर्ज कर लिया है. किशन सिंह का कहना है कि राज ठाकरे के बयान के बाद महाराष्ट्र में बिहार के लोगों के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा में उनके दोनों हाथ काट दिए गए. यह मामला पिछले दिनों तब चर्चा में आया जब बिहार के सांसदों ने इस मामले को संसद में उठाया. इसके बाद गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने लोकसभा में बताया था कि ऐसी किसी घटना की सूचना महाराष्ट्र सरकार को नहीं है और महाराष्ट्र सरकार इस मामले की तहक़ीक़ात के लिए एक जाँच दल बिहार भेज रही है. महाराष्ट्र से आए जाँच दल ने इस मामले पर मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया लेकिन बयान लिए जाने के समय वहीं मौजूद बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि किशन सिंह ने वही बयान दिया है जो पहले दिया था. किशन सिंह ने अपने बयान में कहा है, "मैं पुणे में हर दिन की तरह चना बेचने के बाद फुटपाथ पर सोया था. अचानक मैंने एक भीड़ आते देखी. लोग चिल्ला रहे थे भागो.. भागो. मैं भी भागने लगा. भीड़ मेरे क़रीब पहुँच चुकी थी. इसके बाद मैं गिर पड़ा और बेहोश हो गया. जब मुझे होश आया तो मैंने देखा कि मेरे दोनों हाथ कट चुके थे और मैं अस्पताल मैं पड़ा था". जाँच महाराष्ट्र पुलिस के जाँचकर्ता दल का नेतृत्व कर रहे पुलिस उपायुक्त संग्राम सिंह निशानदार ने बताया, "हमने तमाम बिंदुओं पर जाँच की है और यह रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को जल्द ही सौंप दी जाएगी". लेकिन उन्होंने इससे अधिक बताने से मना कर दिया. सिवान के रघुनाथपुर थाना के दुदहा गाँव के 37 वर्षीय किशन सिंह पिछले दस सालों से पुणे में चने बेचकर अपनी जीविका चलाते थे. वे कहते हैं, "मेरे पास रहने को कोई घर नहीं था इसलिए हम रात में फुटपाथ पर ही सोते थे". हालाँकि हाथ कटने की घटना लगभग एक महीना पहले की है लेकिन उनके चेहरे पर अब भी काफ़ी खौफ़ है. सिवान के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार का कहना है, "जाँच दल ने किशन सिंह और उसके रिशतेदारों से घंटों बातचीत की. किशन इतना आतंकित हैं कि कई बार वह अपनी बात सही ढंग से नहीं कह पा रहे हैं". |
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