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पूर्व सरकार के कई धुरंधर धराशायी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में नेशनल एसेंबली और चार प्रांतीय एसेंबलियों के लिए हुए चुनाव के नतीजों में में काफ़ी उलटफ़ेर देखने को मिला है. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की समर्थक कही जाने वाली मुस्लिम लीग (क़ायदेआज़म) को न सिर्फ़ हार का सामना करना पड़ा है बल्कि इसके कई धुरंधर नेता और सरकार में मंत्री रहे नेताओं को भी हार का मुँह देखना पड़ा है. और तो और ख़ुद पार्टी अध्यक्ष के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन भी दो चुनाव क्षेत्रों से हार कर संसद से बाहर हो गए हैं. इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ के 61 सदस्यीय मंत्रिमंडल के 25 से ज़्यादा मंत्रियों को भी चुनाव में शिकस्त मिली है. सबसे चौंकाने वाली हार पूर्व रेलमंत्री शेख़ रशीद अहमद जैसे घाघ नेता की है, जो कि 1985 से अभी तक लगातार जीतते आ रहे थे. हारने वाले दूसरे प्रमुख लोगों में पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद क़सूरी, वाणिज्य मंत्री हुमायूँ अख़्तर ख़ान, खाद्य और आपूर्ति मंत्री सिकंदर हयात बोसन, ऊर्जा मंत्री लियाक़त अली जतोई और पूर्व राष्ट्रपति जनरल ज़ियाउल हक़ के पुत्र और धार्मिक मामलों के मंत्री ऐजाज़ुल हक़ जैसे बड़े नाम शामिल हैं. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को छोड़ कर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ समर्थक सरकार का हिस्सा बनने वाले रक्षा मंत्री राव सिकंदर इक़बाल को उनके चुनावी क्षेत्र के विकास के काम भी हार से नहीं बचा सके. उधर राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बचाव में संविधान की नित नई व्याख्याएँ करने वाले संसदीय मामलों के मंत्री शेर अफ़ग़ान नियाज़ी भी अपनी सीट नहीं बचा पाए. बड़े नाम मार्च 2007 में मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार चौधरी को हटाए जाने के बाद हुए हंगामे के दौरान अपने दिलचस्प बयानों के कारण चर्चित उस समय के क़ानून मंत्री वसी ज़फ़र का नाम भी हारने वालों की फ़ेहरिस्त में शामिल है.
हारने वालों में चौधरी ज़फ़र इक़बाल वड़ाइच जैसे सिद्धान्तवादी व्यक्ति भी शामिल हैं जिन्होंने 2002 का चुनाव पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के टिकट पर जीतने के बाद इस्तीफ़ा दिया और मुस्लिम लीग (क़ायदेआज़म) के टिकट पर दोबारा चुनाव जीत कर मंत्रिमंडल में शामिल हुए. इसके अलावा पूर्व सामाजिक कल्याण मंत्री आबादी चौधरी शहबाज़ हुसैन, शिक्षा मंत्री ज़ुबैदा जलाल, संचार राज्य मंत्री इशाक ख़ाक़वानी और विधि राज्य मंत्री शाहिद अकरम भिंडर भी अपनी सीटें नहीं बचा सके. नौजवान मंत्रियों में सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ओवेस ख़ान लेघारी, पर्यावरण राज्य मंत्री मलिक अमीन असलम, वित्त राज्य मंत्री उमर अय्यूब ख़ान, विदेश राज्य मंत्री ख़ुसरो बख़्तियार और रेल राज्य मंत्री अली असज़द मलही भी चुनावी दंगल में पराजित रहे हैं. हारे लोगों में 34 ऐसे लोग भी हैं जो विभिन्न संसदीय समितियों से जुड़े हुए थे और उनमें एक बड़ा नाम संसद के स्पीकर चौधरी अमीर हुसैन का भी है जो अपनी सीटें नहीं बचा सके. |
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