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उत्तर प्रदेश में सपा का विरोध प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में विपक्षी समाजवादी पार्टी राज्य में बिक्री कर की जगह वैट लागू करने के विरोध में गुरुवार को धरने प्रदर्शन का आयोजन किया है. इस दौरान हिंसा भड़कने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. हालांकि पार्टी का ये आंदोलन पहले ही घोषित था लेकिन समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल सिंह यादव के साथ पुलिस बदसलूकी के बाद पूरी पार्टी इस आंदोलन में कूद गई है. पार्टी के महासचिव अमर सिंह लखनऊ में विरोध प्रदर्शन करेंगे तो समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह के बेटे और सांसद कन्नौज में पार्टी कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करेंगे. बुधवार को पुलिस फायरिंग में समाजवादी समर्थक एक छात्र की मृत्यु हो गई थी. मुख्यमंत्री मायावती ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि समाजवादी पार्टी "गुंडे-बदमाश" इकट्ठा करके अशांति फैला रही है. मुख्यमंत्री मायावती ने चेतावनी दी है कि अगर समाजवादी पार्टी ने शांति भंग करने की कोशिश की तो पुलिस उनके साथ सख़्ती से पेश आएगी, फिर चाहे स्वयं मुलायम सिंह यादव ही क्यों न हों. दूसरी तरफ़ समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर पुलिस ने जानबूझकर और बेवजह गोली चलाई. टकराव की शुरुआत दरअसल इस टकराव की शुरुआत मंगलवार को हुई जब मायावती सरकार के दो मंत्री लखनऊ के जयनारायण डिग्री कालेज के स्थापना दिवस समारोह मे गए थे. समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थक छात्र वहाँ पहुँच कर काले झंडे दिखाने लगे और छात्र संघों को बहाल कर चुनाव कराने की मांग की. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि मंत्रियों ने इन छात्रों को गालियाँ दीं और पुलिस को लाठी चलाने के लिए कहा. लाठी चार्ज मे अनेक छात्र घायल हो गए और कई छात्र गिरफ़्तार कर लिए गए. छात्रों को रिहा कराने के लिए समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल यादव धरने पर बैठ गए. शिवपाल यादव का आरोप है कि पुलिस वालों ने उनके साथ बदसलूकी की और मारपीट की. इससे पूरे प्रदेश में अनेक स्थानों पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भड़क गए और सडकों पर उतर आए. समाजवादी पार्टी ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर मायावती सरकार को बर्ख़ास्त करने और दोषी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की मांग की है. |
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