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क़रीब चार हज़ार पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती मुलायम सिंह सरकार के दौरान भर्ती किए गए तीन हज़ार नौ सौ चौंसठ पुलिसकर्मियों को भर्ती में गड़बड़ियाँ बताते हुए बर्ख़ास्त कर दिया है. इससे पहले छह हज़ार पाँच सौ चार पुलिसकर्मियों को भी भर्ती में गड़बड़ियाँ बताते हुए बर्ख़ास्त किया जा चुका है. इस तरह लगभग एक सप्ताह में कुल मिलाकर क़रीब साढ़े दस हज़ार पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त किया जा चुका है. बर्ख़ास्त किए गए पुलिसकर्मियों में सिविल पुलिस और पीएसी के जवान शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि अभी लगभग दस हज़ार और ऐसे पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है जिनकी भर्ती मुलायम सिंह सरकार के दौरान हुई थी. मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने की थी. इस समिति ने मुलायम सिंह सरकार के दौरान कुल 55 भर्ती बोर्डों में से 32 की जाँच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. उत्तर प्रदेश के प्रधान गृह सचिव जेएन चेंबर ने मंगलवार को लखनऊ में पत्रकारों को बताया कि भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के ऐसे छह अधिकारियों को भी निलंबित किया जा रहा है जो विभिन्न चरणों में पुलिस सिपाहियों की भर्ती करने वाले बोर्डों के चेयरमैन रहे थे. प्रधान गृह सचिव जेएन चेंबर ने बताया कि मुलायम सिंह सरकार के दौरान कुल 55 चरणों में पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई थी जिनमें से 14 चरणों की भर्ती की जाँच पहले हो चुकी है और 11 की जाँच फिलहाल की गई जिनमें से दस में गड़बड़ियाँ पाए जाने के बाद 3964 पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करने के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि एक चरण में भर्ती की प्रक्रिया आमतौर पर ठीक पाई गई इसलिए उस चरण में भर्ती किए गए 310 पुलिसकर्मियों को बहाल रखा जा रहा है. ग़ौरतलब है कि 12 आईपीएस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. कुल मिलाकर 18 आईपीएस अधिकारियों को अभी तक निलंबित किया जा चुका है. कुछ ऐसे पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है जो भर्ती बोर्डों के सदस्य रहे हैं और जो डीएसपी स्तर के अधिकारी हैं. इन भर्तियों के सिलसिले में जिन इस स्तर के अब तक लगभग 120 पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई होगी. जेएन चेंबर ने बताया कि इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई की जाएगा और आपराधिक मुक़दमे भी दर्ज किए जाएंगे. ग़ौरतलब है कि 11 सितंबर 2007 को बर्ख़ास्त किए गए 6504 पुलिसकर्मियों में से अनेक ने अपनी बर्ख़ास्तगी के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है. मायावती सरकार ने कहा है कि छह महीने के भीतर पुलिस की नई भर्ती की जाएगी और उसके लिए पहले के उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं. उधर मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी ने कहा है कि मायावती सरकार की यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और अगर वह फिर से सत्ता में आती है तो इन भर्तियों को बहाल किया जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें इलाहाबाद कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती 16 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस हज़ारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्तियाँ रद्द14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस फिर शुरू हुआ ब्राह्मण राजनीति का खेल13 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस साढ़े छह हज़ार पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त 11 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में छात्र संघ चुनावों पर प्रतिबंध08 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे05 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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