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फिर शुरू हुआ ब्राह्मण राजनीति का खेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत का राजनीतिक राज्य कहे जाने वाले उत्तरप्रदेश की राजनीति आगामी संसदीय चुनावों से काफी पहले से ही गर्माने लगी है और इसी के मद्देनज़र अब राजनीतिक दलों ने ब्राह्मण मतदाताओं को अपने साथ लाने की कवायद शुरू कर दी है. राज्य की विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) ने गुरूवार को ब्राह्मणों की 'सनातन समाज पार्टी' के साथ गठजोड़ किया है. इसका उद्देश्य ब्राह्मण मतदाताओं को अपने क़रीब लाने की कोशिश माना जा रहा है. सपा प्रमुख और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 'सनातन समाज पार्टी' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृपाशंकर मिश्र के साथ मिलकर सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के ख़िलाफ़ अभियान चलाने की घोषणा की. सपा के मुताबिक 'ब्राह्मण भ्रम भंजन' अभियान के ज़रिए ब्राह्मणों को बताया जाएगा कि उन्हीं के वोटों की बदौलत ही मुख्यमंत्री बनीं बसपा प्रमुख मायावती ब्राह्मणों की दुश्मन हैं. बहुजन बनाम सर्वजन राज्य में इसी साल मई में हुए विधानसभा चुनावों में मायावती के दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के ज़रिए बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में पहुंचने में कामयाब रही थी.
आँकडों के मुताबिक़ उत्तरप्रदेश में 12 फ़ीसदी ब्राह्मण हैं जिन्हें काफ़ी हद तक निर्णायक माना जाता है. कृपाशंकर मिश्र ने मुलायम सिंह के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस गठजोड़ के ज़रिए वो मुलायम सिंह यादव को फिर सत्ता में वापस लाएंगे. माना जा रहा है कि मुलायम सिंह ने मायावती की सफलता से सबक लेते हुए अब निर्णायक रणनीति के तहत ब्राह्मण वोटों पर नज़रें टिका दी हैं. पिछले कुछ वर्षों में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है. एक समय दलित और पिछड़ों की राजनीति करने वाले ये राजनीतिक दल अब खुलकर ब्राह्मण-क्षत्रिय जैसी उच्च जातियों की चुनावी महत्ता को भुनाने का प्रयास करते नज़र आ रहे हैं. बहुजन समाज या पिछड़ों की नेता मानी जाने वाली मायावती भी अब सर्वजन समाज का नारा दे रही हैं. गुरूवार को उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अब राज्यभर के सभी गाँवों को 'अम्बेडकर विकास योजना' के तहत विकसित किया जाएगा. इससे पहले इस योजना के दायरे में वही गाँव आते थे जिनकी पचास फ़ीसदी आबादी दलित होती थी. उन्होंने कहा कि अब सभी जातियों का विकास किया जाएगा. वर्ष 2009 में संसदीय चुनाव होने हैं, और सपा-बसपा के बीच ही मुख्य मुक़ाबला माना जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें बदले-बदले हैं मुलायम सिंह यादव14 अक्तूबर, 2003 | भारत और पड़ोस मुलायम सिंह की मुश्किलें19 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में 45 प्रतिशत मतदान07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस नए समीकरण गढ़ने वाली माया11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस जीत की खुशियाँ और हार का मातम11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश चुनावों के सबक11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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