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जीत की खुशियाँ और हार का मातम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजों और रुझानों से बहुजन समाज पार्टी के कार्यालय में जहाँ ख़ुशी का माहौल है, वहीं समाजवादी पार्टी का दफ़्तर सूना है और भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में भी चहल-पहल कम है. लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के घर के बाहर पटाखे छूट रहे हैं और नगाड़े बजाए जा रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और ढोल-नगाड़ों के बीच नाच-गा रहे हैं. मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं और मायावती ज़िंदाबाद के नारे गूँज रहे हैं. होली तो बीत गई है लेकिन बसपा कार्यकर्ता एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर जीत का जश्न मना रहे हैं. एक पार्टी कार्यकर्ता ने कुछ यूँ अपनी ख़ुशी का इजहार किया- हमारी नेता ने उत्तर प्रदेश में जंगल राज का ख़ात्मा कर दिया है. अब राज्य में क़ानून का राज्य स्थापित होगा और भ्रष्ट राजनेता जेल जाएँगे. निराशा दूसरी ओर समाजवादी पार्टी कैंप में निराशा है. मुलायम सिंह यादव के आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर सुबह से भीड़ जमा थी लेकिन नतीजे आने के साथ-साथ ये भीड़ कम होने लगी.
पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है. हालाँकि चुनाव पूर्व और चुनाव बाद सर्वेक्षणों में ये बताया जा रहा था कि मुलायम सिंह की पार्टी दूसरे नंबर पर रहेगी लेकिन इतनी कम सीटें मिलेंगी, इसका पार्टी नेताओं को एहसास नहीं था. मुलायम सिंह यादव ने तो हार स्वीकार कर ली है. दूसरी ओर पंजाब और उत्तराखंड में जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदें भी धरी की धरी रह गईं. पार्टी के लखनऊ और नई दिल्ली कार्यालय में निराशा का माहौल है और पार्टी के नेता हार की वजहें गिनाने में लगे हैं. पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के गृह राज्य में पार्टी की दुर्गति से निराश ज़्यादातर नेता पार्टी कार्यालय से ग़ायब हो गए हैं. लेकिन कलराज मिश्र, मुख़्तार अब्बास नक़वी और सुषमा स्वराज मीडिया से बात कर रहे हैं और हार की वजह बता रहे हैं लोगों का बसपा को विकल्प के रूप में स्वीकार करना.
सुषमा स्वराज का कहना है, "जनता ने बहुजन समाज पार्टी को मुलायम सिंह यादव सरकार के विकल्प के रूप में स्वीकार किया. हमने अपने को विकल्प के रूप में पेश किया था लेकिन इसमें देर हो गई." कांग्रेस कार्यालय की भी कमोबेश स्थिति वही है. उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी ने कई रैलियाँ की थी और पार्टी ने दावा किया था कि वो इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी. लेकिन नतीजे बता रहे हैं पार्टी की हालत और ख़राब हुई है. लेकिन कांग्रेस के नेता ये बता रहे हैं कि नतीजे मुलायम सरकार और सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ है. हालाँकि पार्टी नेताओं की इस दलील से पार्टी कार्यकर्ताओं में कोई उत्साह नहीं. | इससे जुड़ी ख़बरें मुलायम ने हार मानी, बसपा को बढ़त10 मई, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझान11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में 45 प्रतिशत मतदान08 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'भाजपा विवादास्पद सीडी की निंदा करे'08 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बाहुबलियों का दबदबा बदस्तूर जारी06 मई, 2007 | भारत और पड़ोस लंबी पारी खेलने आया हूँ : राहुल गांधी05 मई, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में 'गुंडागर्दी' चरम पर01 मई, 2007 | भारत और पड़ोस कार्यकर्ताओं की पिटाई से राहुल ख़फ़ा29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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