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रविवार, 06 मई, 2007 को 15:15 GMT तक के समाचार
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बाहुबलियों का दबदबा बदस्तूर जारी

इस चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों में 882 ऐसे हैं जिनके ऊपर आपराधिक मुक़दमे चल रहे हैं.

पिछले चुनावों में ये संख्या 506 थी और जिसमें से 206 विजयी होकर विधानसभा में पहुँचे थे.

यूपी चुनावों में पैनी नज़र रख रहे स्वतंत्र संगठन यूपी इलेक्शन वाच की मानें तो इस बार के चुनावों में आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों की संख्या में 74 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

गोरखपुर से चुनाव लड़ रहे हरिशंकर तिवारी का नाम बाहुबली प्रत्याशियों की सूची में सबसे ऊपर गिना जा सकता है. वे गोरखपुर के चिल्लूपार क्षेत्र से छह बार चुनाव जीत चुके हैं.

क्षेत्र में ख़ुद के किए कामों के बारे में वो कहते हैं,"आप क्षेत्र में घूमे तो आपको स्कूल, बिजली और सड़क दिखाई देगी. ये विकास का काम नहीं है तो क्या है."

हरिशंकर तिवारी की ही तरह मऊ के मुख़्तार अंसारी इस इलाक़े के बड़े बाहुबली माने जाते हैं.

 बाहुबलियों ने सोचा कि ये नेता अगर हमारे दम पर ही चुनाव जीत रहे हैं तो क्यों न हम ही चुनाव लड़ें
रामकृष्ण त्रिपाठी, बुद्धिजीवी

भाजपा विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का उन पर आरोप है. चुनाव आयोग की सख़्ती की वजह से उन्हें गोरखपुर जेल से हटाकर झांसी जेल भेजा गया है.

अपने समर्थकों के लिए मुख़्तार रॉबिनहुड से कम नहीं हैं.

उनके एक समर्थक कहते हैं, "ये मुख़्तार अंसारी की देन है कि यहाँ 20 से 22 घंटे बिजली रहती है."

कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में सज़ा काट रहे अमरमणि त्रिपाठी भी महाराज गंज की लक्ष्मीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

टक्कर

सुऱक्षा
सुरक्षा व्यवस्था में सख़्ती की वजह से बाहुबलियों की ज़्यादा नहीं चली

मधुमिता की माँ और बहन अमरमणि के ख़िलाफ़ उनके क्षेत्र में जाकर प्रचार कर रही हैं.

पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहे बाहुबलियों की लिस्ट बहुत लंबी है. देवरिया में आपराधिक पृष्ठभूमि के आठ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबलियों के बढ़ते हस्तक्षेप पर राजनीति विज्ञानी रामकृष्ण त्रिपाठी कहते हैं," पोलिंग बूथ पर क़ब्ज़ा करने के लिए बाहुबलियों की ज़रूरत थी. इस तरह राजनेता बाहुबलियों पर आश्रित होने लगे. ऐसे में बाहुबलियों ने सोचा कि जब ये नेता अगर हमारे दम पर ही चुनाव जीत रहे हैं तो क्यों न हम ही चुनाव लड़ें."

हर पार्टी चुनावों में आपराधिक छवि के लोगों को चुनाव लड़ाती है.

भाजपा के गठबंधन सहयोगी अपना दल से चुनाव लड़ रहे पवन पांडे के ख़िलाफ़ अपराध के 63 मामले दर्ज हैं.

 बाहुबलियों को सबसे बड़ा समर्थन डरे हुए पूंजीपतियों से मिलता है. जो अपनी सुरक्षा के भय से इन बाहुबलियों को धन देता है
त्रिवेणी प्रसाद, स्थानीय नागरिक

माफ़िया के हाथों अपने बेटे की हत्या का दुख झेल चुके वकील त्रिवेणी प्रसाद कहते हैं कि माफ़िया की चुनावी जीत का ये दौर रुकेगा.

इस माफ़िया के पीछे समर्थन की बात पर वो कहते हैं,"बाहुबलियों को सबसे बड़ा समर्थन डरे हुए पूंजीपतियों से मिलता है. जो अपनी सुरक्षा के भय से इन बाहुबलियों को धन देता है."

सख़्ती

चुनाव आयोग की सख्ती का असर उत्तर प्रदेश चुनावों पर देखने को मिल रहा है और बाहुबलियों की मनमानी पर कुछ लगाम लगी है.

लेकिन रामकृष्ण त्रिपाठी कहते हैं, चुनाव आयोग की सख़्ती से चुनाव प्रक्रिया में बदलाव आ रहा है लेकिन देश की राजनीतिक संस्कृति नहीं बदल रही है. जब तक राजनीतिक दल नहीं बदलेंगे तब तक बड़ा बदलाव होने वाला नहीं है.

क्या राजनीति फिर जनता से जुड़ेगी, क्या माफ़ियाराज उखड़ेगा या कुर्सी का प्रेम राजनीति के अवमूल्यन को जारी रखेगा.

क्या हम ऐसे राजनीतिक आंदोलन को देखेंगे जो राजनीति में आई इस बुराई को दूर करेगा शायद इन सबका जवाब जनता के मत में छिपा है.

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