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'पुलिस भर्ती के लिए स्वतंत्र आयोग बने' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों ने पुलिस भर्ती के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाने का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि इस आयोग के सदस्यों का चयन सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित राज्य सुरक्षा समिति के जरिए की जाए. राज्य के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशकों ने गुरूवार को लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पुलिस भर्ती की प्रक्रिया मे निष्पक्षता और पारदर्शिता ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि कि पुलिस में पदोन्नति का काम भी प्रस्तावित आयोग के जिम्मे होना चाहिए. ये सुझाव राज्य में हुए हाल के कथित पुलिस भर्ती घोटाले को ध्यान मे रखते हुए दिए गए हैं. इन लोगों ने पुलिस सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर अमल नहीं होने पर भी चिंता जाहिर की. भर्ती में 'गड़बड़ी' राज्य की वर्तमान मायावती सरकार ने मुलायम सिंह यादव सरकार के समय भर्ती किए गए लगभग 18 हजार सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया था. अधिकारियों का कहना था कि 2004-05 की मुलायम सरकार के दौरान पुलिस भर्ती के पुराने नियमों की अनदेखी की गई. 1998 मे जारी नियमों के अनुसार प्रशिक्षण पर भेजे जाने से पहले प्रशिक्षु पुलिसकर्मी का चरित्र सत्यापन कराना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिसके कारण ऐसे लोग पुलिस मे भर्ती हो गए जिनका आपराधिक रिकार्ड था. सुझाव रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक श्रीराम अरुण का कहना है कि, “अगर पुलिस भर्ती की प्रक्रिया में ही गड़बड़ होगी तो फ़िर आगे सब कुछ गड़बड़ ही होगा. इसलिए शुरू से ही भर्ती मे सुधार पर ध्यान दिया जाए.” एक अन्य रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक ईश्वर चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि भर्ती नियमों को पारदर्शी बनाना जरूरी है. उनका कहना था कि,“ एक बार ग़लत आदमी भर्ती हो जाता है, उसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग देते हैं. लेकिन हथियार चलाने की ट्रेनिंग पाने के बाद निकाले जाने पर वो और ख़तरनाक हो जाते है." सभी अधिकारियों का मानना था कि अब भर्ती के काम को पहले की तरह ज़िलों के पुलिस अधिकारियों पर नहीं छोड़ा जा सकता . एक और रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक के एल गुप्ता का कहना था कि उनके समय में पुलिस अधीक्षक भर्ती कर लेते थे, लेकिन अब उन पर कई तरह के बाहरी दबाव होते हैं. उनका कहना था कि एक स्वतंत्र भर्ती बोर्ड हो जो निष्पक्ष तरीके से चुना जाए और वही भर्ती और पदोन्नति का काम भी देखे. सभी की एक राय थी कि भर्ती के लिए 'लोक सेवा आयोग' की तरह एक स्वतंत्र पुलिस भर्ती आयोग बनाया जाए और इसके सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट की सुझाई राज्य सुरक्षा समिति चुने जिसमें मुख्यमंत्री के अलावा विपक्ष के नेता और कुछ स्वतंत्र नागरिक भी शामिल होंगें. हालांकि पुलिस सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर अभी तक उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने अमल ही नहीं किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें नए समीकरण गढ़ने वाली माया11 मई, 2007 | भारत और पड़ोस हज़ारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्तियाँ रद्द14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पुलिस अधिकारियों की गिरफ़्तारी पर रोक21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी में अपराधों के ख़िलाफ़ विधेयक 31 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस क़रीब चार हज़ार पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त18 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में 7400 पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त30 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पुलिस जाँच में चौकाने वाले तथ्य20 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नई पुलिस भर्ती पर न्यायालय की रोक19 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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