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उत्तर प्रदेश में 7400 पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार ने 7400 और पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त कर दिया है. राज्य के गृह सचिव जेएन चेंबर ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा की. उत्तर प्रदेश में भर्ती घोटाले में जाँच कर रहे अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने कहा है कि पिछली मुलायम सिंह सरकार के दौरान पुलिस भर्ती में ना सिर्फ़ रुपयों का लेन-देन और राजनीतिक हस्तक्षेप ही हुआ बल्कि महिला आवेदकों के शारीरिक शोषण की शिकायतें भी आई हैं. पिछली मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल के दौरान 55 भर्ती बोर्ड ने 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की थी. सत्ता में आते ही मायावती ने भर्ती में कथित अनियमितता की जाँच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र की अध्यक्षता में जाँच समिति गठित की. राज्य के गृह सचिव जेएन चेंबर ने बताया कि इन पुलिसकर्मियों की नियुक्ति में गड़बड़ी की गई थी. इन सभी पुलिसकर्मियों की नियुक्ति मुलायम सिंह यादव सरकार के कार्यकाल में हुई थी. मुख्यमंत्री मायावती ने सात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी किया है. ताज़ा घोषणा के बाद अभी तक कुल 18000 पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त किया जा चुका है. साथ ही 25 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी किया जा चुका है. और तो और 150 पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. हालाँकि पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बर्ख़ास्त पुलिसकर्मियों के स्थान पर भर्ती करने से फिलहाल रोक दिया है. मायावती सरकार का कहना है कि उन भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ हुई थीं. कोर्ट में मामला लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करके पूछा था कि सरकार ने पुलिसकर्मियों को किस आधार पर सेवा से बर्ख़ास्त किया गया है.
इसके बावजूद मायावती सरकार ने ताज़ा घोषणा के तहत 7400 और पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करने की घोषणा कर दी है. न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख़ 10 अक्तूबर 2007 निर्धारित की है. अब तक लगभग एक हज़ार ऐसे पुलिसकर्मियों ने न्यायालय में याचिकाएँ दाख़िल की हैं जिन्हें नई सरकार ने बर्ख़ास्त कर दिया है. याचिका दायर करने वाले पुलिसकर्मियों ने दलील दी है कि उनकी बर्ख़ास्तगी राजनीति से प्रेरित है और यह सरकार का मनमाना क़दम है. मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने की थी. इस समिति ने मुलायम सिंह सरकार के दौरान कुल 55 भर्ती बोर्डों में से 32 की जाँच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. उधर मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी का कहना है कि मायावती सरकार की यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और अगर वह फिर से सत्ता में आती है तो इन भर्तियों को बहाल किया जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें पुलिस अधिकारियों की गिरफ़्तारी पर रोक21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पुलिस जाँच में चौकाने वाले तथ्य20 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस इलाहाबाद कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती 16 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस हज़ारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्तियाँ रद्द14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस फिर शुरू हुआ ब्राह्मण राजनीति का खेल13 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस साढ़े छह हज़ार पुलिसकर्मी बर्ख़ास्त 11 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में छात्र संघ चुनावों पर प्रतिबंध08 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे05 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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