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गुरुवार, 20 सितंबर, 2007 को 11:19 GMT तक के समाचार
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पुलिस जाँच में चौकाने वाले तथ्य
भारतीय पुलिस
अनेक पुलिसकर्मियों ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है
उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह सरकार के दौरान हुई पुलिस भर्ती में कथित अनियमितताओं की जाँच करने वाली रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

मसलन एक ऐसे व्यक्ति को पुलिस जवान के रूप में भर्ती किया गया जिसका वज़न 110 किलोग्राम था और वह तीन किलोमीटर की दूरी तक भी नहीं दौड़ सका था जोकि भर्ती के लिए एक प्रमुख शर्त है.

राज्य में पिछले क़रीब एक सप्ताह के दौरान लगभग दस हज़ार पुलिसकर्मियों को यह कहते हुए मायावती सरकार ने बर्ख़ास्त कर दिया है कि उनकी भर्ती में अनियमितताएं बरती गई थीं.

ग़ौरतलब है कि मई 2007 में हुए प्रांतीय चुनाव में मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल करके सरकार बनाई थी.

राज्य की पूरवर्ती मुलायम सिंह सरकार के कार्यकाल में लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई थी लेकिन मायावती सरकार ने उस भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और रिश्वतखोरी के आरोपों की जाँच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्रा की अध्यक्षता में दस सदस्यों वाली एक कमेटी गठित की थी जिसकी रिपोर्ट पर दस हज़ार पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त किया जा चुका है.

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इस शैलजाकांत मिश्रा की अध्यक्षता वाली समिति की पूरी रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आ जाएगी जिसमें संभवतः और दस-बारह हज़ार पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करने की सिफ़ारिश की जाएगी.

राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि इन बर्ख़ास्तगियों से रिक्त हुए स्थानों को जल्दी ही नई भर्ती से भरा जाएगा और नई भर्ती प्रक्रिया छह महीने के भीतर शुरू की जाएगी.

लेकिन एक दिन पहले ही गत बुधवार को ही राज्य के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फिलहाल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से रोक दिया था.

मायावती और पुलिस अधिकारी
मायावती सरकार ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की जाँच कराई

चौंकाने वाले तथ्य

  • साढ़े तीन दिन में लगभग सात हज़ार उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया गया यानी अगर एक दिन आठ घंटे का कामकाज लगाया जाए तो हर घंटे लगभग ढाई सौ उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया गया यानी हर एक मिनट में चार से ज़्यादा उम्मीदवार.
  • भर्ती किए गए पुलिसकर्मियों में से कुछ की अचानक जाँच से पता चला कि उनमें से 370 नज़र कमज़ोर थी और रंगों की पहचान करने में सक्षम नहीं थे जबकि यह भी भर्ती की एक प्रमुख शर्त होती है.
  • भर्ती किया गया एक ऐसा पुलिस जवान ऐसा भी पाया गया जिसे निशानेबाज़ी की परीक्षा में दूसरा स्थान मिला था लेकिन वह रंगों की पहचान करने में नाकाम रहा. जाँचकर्ताओं ने आश्चर्य जताया कि ऐसा कैसे हो सकता है कि जब वह रंगों की पहचान करने में नाकाम रहा और निशानेबाज़ी की परीक्षा में अलग-अलग रंगों के निशानों को भेदने में उसे दूसरा स्थान मिला.
  • विशेषज्ञों का कहना है कि भर्ती परीक्षा के दौरान लगभग पचास पुलिसकर्मियों की लिखावट की जाँच-पड़ताल की गई तो पाया गया की उनकी लिखावट ने उनके अन्य दस्तावेज़ों में उनकी लिखावट से मेल नहीं खाया. जाँचकर्ताओं का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि भर्ती परीक्षा में नक़ली उम्मीदवार बिठाए गए थे.

उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जबीर अहमद का कहना था, "तमाम नियम-क़ानूनों को कथित तौर पर दरकिनार करके ये पुलिस भर्तियाँ की गई थीं. ऐसा लगता है कि भर्ती करने वाले बहुत जल्दबाज़ी में थे."

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि मायावती सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है और पुलिस भर्ती में कोई अनियमितता नहीं हुई थी.

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