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बुधवार, 19 सितंबर, 2007 को 13:29 GMT तक के समाचार
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नई पुलिस भर्ती पर न्यायालय की रोक

भारतीय पुलिस
अनेक पुलिसकर्मियों ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन रिक्त स्थानों पर पुलिस भर्ती करने से फिलहाल रोक दिया है जो मुलायम सिंह सरकार के दौरान भर्ती किए गए पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करने से ख़ाली हुए हैं.

ग़ौरतलब है कि राज्य की मायातवी सरकार ने ऐसे क़रीब दस हज़ार पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त कर दिया है जिनकी भर्ती मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान की गई थी.

मायावती सरकार का कहना है कि उन भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ हुई थीं.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राकेश तिवारी ने बुधवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी करके पूछा है कि सरकार ने पुलिसकर्मियों को किस आधार पर सेवा से बर्ख़ास्त किया गया है.

न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख़ 10 अक्तूबर 2007 निर्धारित की है.

अब तक लगभग एक हज़ार ऐसे पुलिसकर्मियों ने न्यायालय में याचिकाएँ दाख़िल की हैं जिन्हें नई सरकार ने बर्ख़ास्त कर दिया है.

इलाहाबाद में एक वकील का कहना था कि रोज़ाना याचिकाएँ दाख़िल की जी रही हैं और बर्ख़ास्त किए गए बहुत से पुलिसकर्मी क़ानूनी सलाह लेन के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उमड़ रहे हैं.

याचिका दायर करने वाले पुलिसकर्मियों ने दलील दी है कि उनकी बर्ख़ास्तगी राजनीति से प्रेरित है और यह सरकार का मनमाना क़दम है.

ग़ौरतलब है कि मायावती सरकार ने घोषणा की है कि पुलिसकर्मियों की बर्ख़ास्तगी से जो स्थान रिक्त हो रहे हैं उन पर भर्ती करने के लिए छह महीने के भीतर प्रक्रिया शुरू की जाएगी लेकिन उच्च न्यायालय ने नई भर्ती पर फिलहाल रोक लगा दी है.

अधिकारियों का कहना है कि अभी लगभग दस हज़ार और ऐसे पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है जिनकी भर्ती मुलायम सिंह सरकार के दौरान हुई थी.

मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने की थी.

इस समिति ने मुलायम सिंह सरकार के दौरान कुल 55 भर्ती बोर्डों में से 32 की जाँच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है.

विवाद बढ़ा

उत्तर प्रदेश के प्रधान गृह सचिव जेएन चेंबर ने मंगलवार को लखनऊ में पत्रकारों को बताया था कि भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के ऐसे छह अधिकारियों को भी निलंबित किया जा रहा है जो विभिन्न चरणों में पुलिस सिपाहियों की भर्ती करने वाले बोर्डों के चेयरमैन रहे थे.

मायावती
मायावती ने मई 2007 में मुलायम सिंह सरकार को हरा दिया था

प्रधान गृह सचिव जेएन चेंबर ने बताया कि मुलायम सिंह सरकार के दौरान कुल 55 चरणों में पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई थी जिनमें से 14 चरणों की भर्ती की जाँच पहले हो चुकी है और 11 की जाँच फिलहाल की गई जिनमें से दस में गड़बड़ियाँ पाए जाने के बाद 3964 पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करने के आदेश दिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि एक चरण में भर्ती की प्रक्रिया आमतौर पर ठीक पाई गई इसलिए उस चरण में भर्ती किए गए 310 पुलिसकर्मियों को बहाल रखा जा रहा है.

ग़ौरतलब है कि 12 आईपीएस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है. कुल मिलाकर 18 आईपीएस अधिकारियों को अभी तक निलंबित किया जा चुका है.

कुछ ऐसे पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है जो भर्ती बोर्डों के सदस्य रहे हैं और जो डीएसपी स्तर के अधिकारी हैं. इन भर्तियों के सिलसिले में जिन इस स्तर के अब तक लगभग 120 पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई होगी.

जेएन चेंबर ने बताया कि इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई की जाएगा और आपराधिक मुक़दमे भी दर्ज किए जाएंगे.

उधर मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी ने कहा है कि मायावती सरकार की यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और अगर वह फिर से सत्ता में आती है तो इन भर्तियों को बहाल किया जाएगा.

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