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गुरुवार, 03 जनवरी, 2008 को 21:49 GMT तक के समाचार
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स्कूली छात्र ने सहपाठी को गोली मारी

स्कूली बच्चे (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत के स्कूलों में फ़ायरिंग की ये दूसरी घटना है
मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के एक स्कूली छात्र ने गुरुवार को अपने सहपाठी की गोली मार कर हत्या कर दी.

सतना शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर चोरवरी गाँव में हुई इस घटना में आठवीं में पढ़ने वाले आदिवासी बालक धरमू की मौत हो गई.

गोली चलाने के आरोप में छात्र राहुल ठाकुर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

पुलिस अधिकारी एके झरकारिया ने बताया की गुरुवार दोपहर को दसवीं कक्षा के विद्यार्थी राहुल ठाकुर ने आठवीं में पढने वाले धरमू पर देसी पिस्तौल से फ़ायर किया जिससे धरमू की अस्पताल में मौत हो गई.

दोनों लड़के चोरवरी के स्थानीय हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी हैं.

हालांकि अभी तक इस घटना की वजह के बारे में पुलिस कुछ नहीं बता पा रही है.

लेकिन मृत छात्र की माँ का कहना था कि राहुल ठाकुर ने पहले भी उसके बेटे के साथ मारपीट की थी जिसकी शिकायत धरमू ने स्कूल प्रबंधन से की थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

स्कूल प्रबंधन ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

जाँच के आदेश

ज़िलाधिकारी मनीष रस्तोगी का कहना था कि उन्होंने इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं जिसकी रिपोर्ट जल्द ही प्रशासन को मिल जाएगी.

 मैं स्कूल में गोलीबारी की इन घटनाओं के लिए तीन बातों को ज़िम्मेदार मानता हूँ- समाज में मीडिया, फ़िल्मों, कार्टून और यहाँ तक की खिलौनों के माध्यम से हिंसा का महिमामंडन; पुलिस और न्याय व्यवस्था की कमजोरी और छात्रों पर करियर के लिए बढ़ता दबाव
अनिल सदगोपाल, शिक्षाविद्

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों दिल्ली से सटे गुडगाँव में दो छात्रों ने मामूली झगड़े के बाद अपने एक सहपाठी की स्कूल में गोली मार कर हत्या कर दी थी.

जाने माने शिक्षाविद् अनिल सदगोपाल का कहना है,'' मैं स्कूल में गोलीबारी की इन घटनाओं के लिए तीन बातों को ज़िम्मेदार मानता हूँ- समाज में मीडिया, फ़िल्मों, कार्टून और यहाँ तक की खिलौनों के माध्यम से हिंसा का महिमामंडन; पुलिस और न्याय व्यवस्था की कमजोरी और छात्रों पर करियर के लिए बढ़ता दबाव.''

अनिल सदगोपाल का कहना है कि उन्हें आश्चर्य इस बात से है कि अमरीका के स्कूलों में होने वाली ऐसी घटनाएँ इतनी देर से भारत कैसे पहुँची.

उनका कहना है कि भारत में हिंसा के हालत पैदा करने वाला माहौल काफ़ी पहले तैयार हो चुका है.

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