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तस्लीमा की नज़रबंदी से प्रणव का इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस बात से इनकार किया है कि विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को नज़रबंद रखा गया है. उन्होंने शनिवार को कोलकाता में पत्रकारों से कहा कि तस्लीमा नसरीन भारत में रहने के लिए आज़ाद हैं लेकिन उन्हें यहाँ के लोगों की भावनाओं का ख़याल रखना होगा. पिछले दिनों तस्लीमा ने बीबीसी को बताया था कि उन्हें दिल्ली से कोलकाता वापस नहीं जाने दिया जा रहा है. तस्लीमा की कोलकाता वापसी पर प्रतिबंध की ख़बरों के बारे में पूछे जाने पर प्रणव मुखर्जी ने कहा, "वह चाहे कोलकाता आएं या चेन्नई जाएं, वह नज़रबंद नहीं हैं." उन्होंने कहा कि किसी विदेशी नागरिक के भारत में शरण लेने के आवेदन पर जो नीति अपनाई जाती है वही तस्लीमा के साथ भी लागू होती है. अतिथि का सम्मान विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति किसी अतिथि को जबरन बाहर भेजने की नहीं है. उनका कहना था, "अगर कोई मेहमान रुकना चाहता है तो हम इसके लिए सभी इंतज़ाम करते हैं. मैंने उसी समय कहा था कि हमारी अतिथि को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिससे देश की आबादी के किसी हिस्से की भावना को ठेस पहुंचे." पिछले महीने कोलकाता में ज़बर्दस्त हिंसा के बाद तसलीमा को जयपुर भेज दिया गया था जहाँ से वो दिल्ली आईं. एक अल्पसंख्यक संगठन ने मांग की थी कि तस्लीमा का वीज़ा रद्द कर दिया जाए. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि तस्लीमा को यह विश्लेषण करने की ज़रूरत है कि उन्हें कोलकाता क्यों छोड़ना पड़ा. |
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