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मंगलवार, 27 नवंबर, 2007 को 14:44 GMT तक के समाचार
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घर की तलाश में हैं तस्लीमा नसरीन

तस्लीमा का विरोध
तस्लीमा नसरीन का विरोध भी ज़बरदस्त तरीक़े से हुआ है
भारत में निर्वासन में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन का मामला जहाँ राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है वहीं मंगलवार को दिल्ली में कई ग़ैर सरकारी संगठनों नें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तस्लीमा नसरीन के समर्थन में एक रैली निकाली.

तस्लीमा नसरीन के लिए एक सुरक्षित घर की तलाश अभी जारी है. कोलकता से जयपुर, जयपुर से दिल्ली और फिर कल देर रात फिर उन्हें सुरक्षाकर्मी एक अज्ञात स्थल पर ले गए हैं.

मगर तस्लीमा नसरीन को एक अनपेक्षित जगह से आश्रय का निमंत्रण मिला है. गुजरात के सांप्रदायिक दंगों में हिंदू दंगाइयों का समर्थन करने का आरोप झेल रहे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से.

 सरकार उन्हें सुरक्षा देगी. लेकिन अगर वहां इस मुद्दे पर विरोधप्रदर्शन होते हैं दंगे होते हैं तो इसकी ज़िम्मेदारी भी सरकार की ही होती है
एबी बर्धन

नरेंद्र मोदी गुजरात की एक चुनाव रैली में कह रहे थे, "अगर केंद्र सरकार में तस्लीमा नसरीन को संभालने की हिम्मत नहीं है तो उन्हें गुजरात भेज दें, वहां की जनता इसके लिए समर्थ है".

नरेंद्र मोदी ने तस्लीमा नसरीन को सत्य के लिए लड़ने वाली एक जुझारू साहित्याकार करार दिया.

तस्लीमा नसरीन के मुद्दे पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पहले ही मांग कर चुकी है कि सरकार को इस मामले में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के दबाव में नहीं आना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की तस्लीमा नसरीन सुरक्षा और सम्मान के साथ भारत में रह सके.

आपको याद होगा विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी पहले ही कह चुके हैं कि तस्लीमा नसरीन का वीज़ा बढ़ाने पर सरकार ज़रूर सोचेगी.

मगर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एबी बर्धन इसे भारतीय जनता पार्टी का पाखंड करार देते हैं.

उनका कहना है," मैं कहता हूं उनके जैसे दोहरे मापदंड वाला और कोई नहीं. एमएफ़ हुसैन के बारे में वो क्या करते हैं. उनकी पेंटिंग फाड़ते हैं. वो स्वतंत्रता देते हैं कलाकारों को"?

एमएफ़ हुसैन पिछले कुछ साल से विदेश में निर्वासन में रह रहे हैं क्यों कि उनके ख़िलाफ़ भारत में लोगों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने के कई मुक़दमे चल रहे हैं.

तस्लीमा नसरीन
तस्लीमा नसरीन भारत में राजनीतिक शरण चाहती हैं

लेकिन जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता संसद से सड़क तक तस्लीमा नसरीन के मुद्दे को उठा रहे हैं और गुजरात चुनावों में उसकी गूंज सुनाई दे रही है लगता है यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है.

उधर कई मुस्लिम नेता अभी भी तस्लीमा के ख़िलाफ़ कमर कसे हुए हैं.

महमूद मदनी कहते हैं, "किसी को भी अपने को मिली आज़ादी का ग़लत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है. हमारा मानना यह है कि उन्होंने अपनी किताबों में जो लिखा है उससे मुसलमान ही नहीं किसी भी व्यक्ति जो ईश्वर में विश्वास करता है उसे ठेस पहुंचेगी. तस्लीमा नसरीन को मुल्क से चले जाना चाहिए.’

मंगलवार को दिल्ली में कई ग़ैर सरकारी संगठनों ने अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता और तसलीमा नसरीन के समर्थन में एक रैली की.

रैली की आयोजक कमला भसीन का कहना था यह मुद्दा सरकारों के लिए राजनितिक खेल बन गया है.

बहरहाल तस्लीमा नसरीन की मुश्किलें तो कम होती नहीं दिख रहीं. वो अभी भी कहती हैं कि कोलकाता उनका दूसरा घर है और वो वहीं लौटना चाहेंगी.

लेकिन क्या पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार उन्हें सुरक्षा दे सकती है.

एबी बर्धन का कहना है,"सरकार उन्हें सुरक्षा देगी. लेकिन अगर वहां इस मुद्दे पर विरोधप्रदर्शन होते हैं दंगे होते हैं तो इसकी ज़िम्मेदारी भी सरकार की ही होती है".

जहां पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार इस मामले से निपटने के लिए अपना समय ले रहे हैं तस्लीमा नसरीन को अपने लिए एक घर का इंतज़ार है.

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