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शुक्रवार, 30 नवंबर, 2007 को 12:18 GMT तक के समाचार
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तस्लीमा 'द्बिखंडितो' से कुछ अंश हटाएँगी
तस्लीमा नसरीन
पश्चिम बंगाल में किताब 'द्बिखंडितो' पर प्रतिबंध लगाया गया था
विवादों में घिरी बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा कि वे अपनी किताब 'द्बिखंडितो' में से विवादास्पद अंश हटाने को तैयार हैं. इसका कारण उन्होंने इसके विरोध में भारत में हो रहे ज़ोरदार प्रदर्शन को बताया.

कुछ मुस्लिम संगठन 2003 में लिखी उनकी आत्मकथा 'द्बिखंडितो' की कुछ पंक्तियों को इस्लाम के ख़िलाफ़ बताया है.

पश्चिम बंगाल में इस किताब पर प्रतिबंध लगाया गया था. वहाँ मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या लगभग 25 प्रतिशत है.

हाल में तस्लीमा नसरीन की वीज़ा अवधि बढ़ाए जाने के विरोध में कोलकाता में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 43 लोग घायल हुए थे.

इसके बाद उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें पहले जयपुर और फिर दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर रखा गया है.

भारत सरकार ने कहा है कि वह उन्हें शरण देने और उनकी सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

'इरादा ठेस पहुँचाना नहीं'

 अब मैंने जो लिखा है उससे कुछ लोग भारत में नाराज़ हैं, तो मैंने फ़ैसला किया है कि किताब से विवादास्पद हिस्से हटा दिए जाएँ और मैंने प्रकाशकों को इस बारे में कार्रवाई करने को कहा है
तस्लीमा

उन्होंने शुक्रवार को मीडिया को बताया, "मेरा इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था."

तस्लीमा नसरीन का कहना था, "अब मैने जो लिखा है उससे कुछ लोग भारत में नाराज़ हैं, तो मैंने फ़ैसला किया है कि किताब से विवादास्पद हिस्से हटा दिए जाएँ और मैंने प्रकाशकों को इस बारे में कार्रवाई करने को कहा है."

उनका कहना था, "इन हिस्सों के किताब से हटाए जाने के बाद विवाद की कोई संभावना नहीं रह जाती और पूरा तनाव ख़त्म हो जाना चाहिए."

पश्चिम बंगाल के प्रमुख लेखकों ने इसका स्वागत किया है.

लेखक अबुल बशर का कहना था, "ये उचित समय पर उठाया गया सही कदम है. ये कट्टरपंथियों के सामने हथियार डालने जैसा नहीं बल्कि स्थिति से निपटने के लिए एक समझौता है क्योंकि समाज के हर वर्ग के मुसलमान नाराज़ हैं."

 ये एक समझौता है और शरण लेने के बदले में उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है. लेकिन यदि दो पन्ने हटाकर वे भारत में शरण ले सकती हैं तो वे तीन पन्ने हटाकर बांग्लादेश भी जा सकती हैं
पेंटर शिवप्रसन्ना

'तीन पन्ने हटाकर बांग्लादेश'

उधर जाने-माने पेंटर शिवप्रसन्ना ने कहा कि तस्लीमा ने समझौता किया है.

उनका कहना था, "ये एक समझौता है और शरण लेने के बदले में उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है. लेकिन यदि दो पन्ने हटाकर वे भारत में शरण ले सकती हैं तो वे तीन पन्ने हटाकर बांग्लादेश भी जा सकती हैं."

तस्लीमा नसरीन के विरोध के बाद 1990 के दशक में उन्हें बांग्लदेश से यूरोप निर्वासित होना पड़ा था और वे पिछले तीन साल से कोलकाता में थीं. उन्हें भारत में मार्च 2008 तक रहने का वीज़ा दिया गया है.

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