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तस्लीमाः दिल्ली छोड़ने की अनुमति नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन का कहना है कि भारत सरकार ने उनसे कह दिया है कि अगर भारत में रहना है तो उन्हें ऐसी ही सुरक्षा व्यवस्था में दिल्ली में रहना होगा. ग़ौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन पिछले एक महीने से अधिक से दिल्ली में एक अज्ञात स्थल में रह रही हैं और उन्हें कहीं आने जाने और किसी से मिलने की अनुमति नहीं है. वो लगभग 'नज़रबंद' जैसी स्थिति में रह रही हैं. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा," मुझे भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मैं कोलकाता नहीं जा सकती हूँ और अगर मैं भारत में रहना चाहती हूँ तो मुझे ऐसे ही दिल्ली में रहना होगा.'' तस्लीमा का कहना था कि वो कोलकाता वापस जाना चाहती हैं और वह यहाँ अकेलापन महसूस कर रही हैं. ग़ौरतलब है कि कुछ मस्लिम संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद तस्लीमा नसरीन को कोलकाता छोड़ने को कहा गया था. उसके बाद उन्हें कोलकता से जयपुर, जयपुर से दिल्ली और फिर उन्हें सुरक्षाकर्मी एक अज्ञात स्थल पर ले गए. इसके पहले भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संसद में कहा था कि मेहमानों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐसे क्रियाकलापों से दूर रहें और ऐसे बयान न दें जिनसे हमारे नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुँचे. उन्होंने कहा था कि शरण लेने वाले मेहमानों को राज्य और केंद्र सरकार सुरक्षा प्रदान करती रहेगी और तस्लीमा नसरीन के मामले में भी यही नीति जारी रहेगी. पत्रकारों के तस्लीमा नसरीन के संबंध में भारतीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल और गृह सचिव मधुकर गुप्ता से पूछे जाने पर उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. |
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