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भारत-चीन का संयुक्त सैनिक अभ्यास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और चीन पहली बार संयुक्त सैनिक अभ्यास कर रहे हैं. चीन के दक्षिण-पश्चिमी यून्नान प्रांत में यह सैन्य अभ्यास चल रहा है. इस संयुक्त सैनिक अभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की एक-एक कंपनियाँ हिस्सा ले रही हैं, जिनमें 100 अधिकारी और जवान हैं. वर्ष 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हो चुका है और अभी भी सीमा विवाद है. हालाँकि अब स्थिति बेहतर हुई है और वर्ष 1993 में दोनों देशों ने शांति और स्थिरता के लिए समझौता भी किया था. यह भी तय हुआ था कि दोनों देश सीमावर्ती इलाक़ों में अपने सैनिकों की संख्या में कटौती करेंगे. बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि पहली बार हो रहे इस संयुक्त सैनिक अभ्यास का नाम दिया गया है- हैंड इन हैंड 2007. चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "संयुक्त अभ्यास का मक़सद भारतीय और चीन के सैनिकों के बीच आपसी समझ और भरोसा बढ़ाना है. साथ ही इस अभ्यास के माध्यम से आतंकवाद विरोधी अभियान में एक-दूसरे की मदद करना है." बयान में कहा गया है कि इस अभ्यास का मक़सद 'तीन दुष्ट शक्तियाँ' अलगाववाद, चरमपंथ और आतंकवाद को भी रोकना है और दोनों देशों के बीच शांति और संपन्नता के लिए सामरिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. रिपोर्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त अभ्यास में उन सैनिकों को भेजा गया है जो पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में विद्रोहियों से लड़ रहे हैं. इस अभ्यास के लिए भारतीय सैनिक अपने निजी हथियार, लाइट मशीनगन और मार्टार लेकर गए हैं. जबकि टैंक, लड़ाकू हेलिकॉप्टर और मानवरहित विमान चीन उपलब्ध करा रहा है. जानकारों का कहना है कि संयुक्त अभ्यास के कारण दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होंगे. चीन में एकेडेमी ऑफ़ सोशल साइंस में शोध कर रहे सुन शिहई का कहना है कि संयुक्त सैनिक अभ्यास से दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल बनेगा ख़ासकर सैन्य क्षेत्र में. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह का कहना है कि संयुक्त सैनिक अभ्यास से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ रहा है. वर्ष 1962 में युद्ध के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. 1987 में भारत के एक सैनिक अभ्यास के दौरान एक बार फिर दोनों देशों के बीच लड़ाई छिड़ने की नौबत आ गई थी. सहयोग लेकिन बाद में स्थिति कुछ बेहतर हुई. वर्ष 2006 में दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता किया. उसके बाद से ही दोनों देशों के सैनिक अधिकारी एक-दूसरे के यहाँ आकर प्रशिक्षण ले रहे हैं. सैनिक प्रतिनिधिमंडल भी एक-दूसरे के यहाँ दौरा कर रहे हैं.
पिछले साल चीन ने व्यापार के लिए सामरिक रूप से अहम नाथू ला दर्रा को खोलने की सहमति दे दी थी. इसके बाद से यह भी मान लिया गया कि चीन ने सिक्किम को भारत का अंग के रूप में स्वीकार कर लिया. लेकिन यह भी माना जा रहा है कि भारत और अमरीका के बीच बढ़ती नज़दीकी से चीन चिंतित हैं. इस साल बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा सैनिक अभ्यास हुआ था, जिसमें अमरीकी सैनिकों ने भी हिस्सा लिया था. हाल के महीनों में भारतीय सैनिकों ने विवादित क्षेत्र में चीनी सैनिकों के 'अतिक्रमण' की कई बार शिकायत की है. चीन की ओर से भी अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को लेकर कई बार बयानबाज़ी हुई है. जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी की हाल की चीन यात्रा के कारण द्विपक्षीय संबंध एक बार फिर पटरी पर आए हैं. यह भी माना जा रहा है कि चीम अब भारत और अमरीका के बीच प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर भी आपत्ति नहीं जता रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत और चीन के बीच सैन्य अभ्यास19 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन ने पहला वीज़ा दिया07 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नए दलाई लामा की खोज कैसे होगी?20 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन के लिए अमरीका का विरोध!02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'चीन से तुलना अब बेमानी नहीं लगती'01 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस हू जिंताओ से सोनिया गांधी की मुलाक़ात26 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन की खूबसूरत बला....शंघाई01 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सीमा विवाद पर चर्चा 'सकारात्मक'27 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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