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शुक्रवार, 02 नवंबर, 2007 को 07:34 GMT तक के समाचार
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चीन के लिए अमरीका का विरोध!
वामपंथी नेताओं के साथ यूपीए के मंत्री
अमरीका के साथ परमाणु समझौते के यूपीए सरकार के फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं वामपंथी
भारतीय कम्यनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भारत और अमरीका के बीच सामरिक गठजोड़ का विरोध करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य चीन को दरकिनार करना है.

सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत ने पश्चिम बंगाल में एक कार्यक्रम में कहा, "हम आराम नहीं करेंगे और तब तक लड़ते रहेंगे जब तक अमरीका के साथ सैन्य गठजोड़ ख़त्म नहीं हो जाता."

उन्होंने चीन को सबसे ताक़तवर समाजवादी देश बताया है.

उल्लेखनीय है कि सीपीएम भारत और अमरीका के बीच हुए असैनिक परमाणु समझौता का विरोध कर रही है और उसने यूपीए गठबंधन सरकार को धमकी दी है कि यदि सरकार इस समझौते पर आगे बढ़ती है तो वे समर्थन वापस ले लेंगे.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अभी भी इस समझौते को लेकर सहमति बनने की उम्मीद जता रहे हैं.

साम्राज्यवाद

 अमरीका भारत को अपना सामरिक सहयोगी बनाना चाहता है ताकि वह चीन का सामना कर सके, क्योंकि चीन सबसे ताक़तवर समाजवादी देश है जो अमरीका की ताक़त को चुनौती देने की शक्ति रखता है
प्रकाश कारत, सीपीएम महासचिव

अक्तूबर क्रांति दिवस मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "अमरीका भारत को अपना सामरिक सहयोगी बनाना चाहता है ताकि वह चीन का सामना कर सके, क्योंकि चीन सबसे ताक़तवर समाजवादी देश है जो अमरीका की ताक़त को चुनौती देने की शक्ति रखता है."

उन्होंने कहा कि अमरीका के सैन्य दस्तावेज़ दिखाते हैं कि वह चीन को अमरीकी महत्ता के लिए बड़ी चुनौती मानता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कारत ने कहा, "अमरीका ने अब पाकिस्तान को अपना सैन्य साथी बनाने की रणनीति भी बदल ली है क्योंकि उसे समझ में आ गया है कि यदि भारत को अपने साथ कर लिया जाए तो संतुलन को साम्राज्यवाद और नव-उपनिवेशवाद की ओर पलटा जा सकता है."

उनका कहना था कि भारत के लोग इसके ख़िलाफ़ संघर्ष करेंगे.

उन्होंने कहा कि भारत अपने बाज़ार के कारण भी अमरीका की पसंद बन गया है.

सीपीएम महासचिव कारत ने इस बात के लिए भी भारत को आड़े हाथों लिया कि जब अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध की बात करता है तो भारत सरकार कोई प्रतिक्रिया नहीं करती. उन्होंने इस चुप्पी पर आश्चर्य भी जताया.

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