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सीमा विवाद पर चर्चा 'सकारात्मक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की तीन दिन चली वार्ता के बाद दोनों देशों ने कहा है कि सीमा विवाद पर 'उपयोगी और सकारात्मक' बातचीत हुई है. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और चीन के विदेश उपमंत्री दाई बिंगुओ के बीच हुई वार्ता के बाद जारी बयान में कहा गया है कि बातचीत आगे भी जारी रहेगी. सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच यह ग्यारहवीं दौर की वार्ता थी. इस वार्ता को महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि यह ऐसे समय में हुई है जब भारत के दो बड़े नेता चीन की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस साल के अंत में चीन की यात्रा पर जाना है वहीँ यूपीए और कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी भी राष्ट्रपति हू जिंताओ के निमंत्रण पर चीन की यात्रा पर जाने वाली हैं. दोनों नेताओं की यात्राओं की तारीख़ अभी तय नहीं हुई है. तीन दिन की बातचीत के बाद बीजिंग में भारतीय दूतावास ने बयान जारी करते हुए कहा है, "भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ढाँचा बनाने की दिशा में उपयोगी और सकारात्मक बातचीत हुई है." भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय मसलों को सुलझाने के लिए 2003 में दोनों देशों ने विशेष दूतों की नियुक्ति की थी. उल्लेखनीय है कि भारत का आरोप है कि चीन ने भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर की 41, 180 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़ा कर रखा है. इसमें 5,180 वर्ग किलोमीटर की वह ज़मीन दूसरी ओर चीन का आरोप है कि भारत ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की 90,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अनिधिकृत कब्ज़ा कर रखा है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मक़सद चीन को अलग-थलग करना नहीं'17 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन के ख़िलाफ़ नई 'सामरिक साझेदारी'06 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सीमा विवाद पर सिंह-जियाबाओ के बीच चर्चा14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारत चीन सीमा विवाद सुलझाएँगे15 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सीमा विवाद पर भारत-चीन बातचीत30 नवंबर, 2004 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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