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भारत चीन सीमा विवाद सुलझाएँगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और चीन के शीर्ष नेताओं की बैठक में इस बात पर सहमति हुई है कि 'आपसी सीमा विवाद का उचित हल फ़ौरी तौर पर निकालने का प्रयास' किया जाएगा. न्यूयॉर्क में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की बैठक के बाद यह घोषणा की गई. दोनों नेताओं का कहना था कि जिस आधार पर इस विवाद का निबटारा किया जाएगा उसके मानदंड तय कर लिए गए हैं. भारत और चीन के बीच हुई इस बातचीत की जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा कि इस वर्ष के अंत में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में समस्या के हल की दिशा में प्रगति हो सकती है. भारत के प्रधानमंत्री ने असैनिक परमाणु ऊर्जा की यूरोपीय परियोजना में भारत को शामिल किए जाने का समर्थन करने के लिए चीन के राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया. हू जिंताओ ने भारतीय प्रधानमंत्री को उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चल रही छह देशों की बातचीत के बारे जानकारी दी, इसके अलावा दोनों देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद पर भी चर्चा की. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान के मामले पर भारत और चीन में सहमति है कि यह मसला बातचीत के ज़रिए ही सुलझाया जाना चाहिए. दोनों नेताओं की एक वर्ष में यह चौथी मुलाक़ात थी जो क़रीब आधे घंटे तक चली, दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-चीन संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहतरी की ओर बढ़े हैं. चीन राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझीदार हैं. हू जिंताओ ने कहा कि भारत और चीन की व्यापारिक-सामरिक साझीदारी न सिर्फ़ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभदायक होगी, भारत के प्रधानमंत्री ने इस पर अपनी सहमति जताई. चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि इसी वजह से उनके देश ने आसियान की शिखर बैठक में प्रेक्षक के रूप में भारत के प्रतिनिधित्व का समर्थन किया था. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और चीन का आपसी व्यापार अगले पाँच वर्षों में नहीं बल्कि तीन वर्षों में दोगुना बढ़ सकता है. |
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