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चीनी क़ानून 'भड़काऊ' है: ताइवान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताइवान ने चीन के उस नए क़ानून की निंदा की है जिसके तहत कहा गया है कि ताइवान के ख़ुद को औपचारिक तौर पर स्वतंत्र घोषित करने की स्थिति में चीन उसपर हमला कर सकता है. ताइवान सरकार के एक बड़े अधिकारी जोसफ़ वु ने कहा है कि ऐसे 'गंभीर भड़काऊ क़दमों' से क्षेत्र की सुरक्षा पर गहरा असर पड़ता है. चीनी संसद ने ताइवान पर, उसकी औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा होने पर, हमला करने को वैध ठहराने वाले क़ानून को पारित कर दिया है. मगर चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि ये क़ानून संबंधों को मज़बूत करने के लिए लाया गया है ना कि लड़ाई के लिए. चीन की संसद, नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में इस क़ानून को सर्वसम्मति से पारित किया गया. सोमवार को इस मुद्दे पर हुए मतविभाजन में क़ानून के पक्ष में 2896 मत पड़े, जबकि विरोध में एक भी मत नहीं पड़ा. अभी एक दिन पहले राष्ट्रपति हु जिंताओ ने सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा था. तनाव बढ़ने की आशंका चीनी संसद ने सेना के लिए बजट में 13 प्रतिशत बढ़ोत्तरी को भी स्वीकृति दे दी है. ताइवान ने इस क़दम की निंदा करते हुए कहा है कि इसका क्षेत्रीय स्थिरता को नुक़सान पहुँचाएगा. अमरीकी विदेश मंत्रि कोंडोलीज़ा राइस ने नए चीनी क़ानून से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई है. चीन 1949 में अलग हुए ताइवान को अब भी अपना हिस्सा मानता है. क़ानून पारित होने के बाद प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ ने कहा कि नए क़ानून का लक्ष्य ताइवान के साथ रिश्ते में मज़बूती लाना है. संसद के एक वरिष्ठ सदस्य वु बांगुओ ने कहा, "यह क़ानून ताइवान को चीन से अलग नहीं होने देने के जनता के दृढ़ इरादे का प्रतीक है." |
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