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'ताइवान की स्वतंत्रता स्वीकार नहीं करेगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने संसद के सत्र की शुरुआत में कहा है कि चीन कभी भी ताइवान की औपचारिक स्वतंत्रता स्वीकार नहीं करेगा. इस सत्र के दौरान अलगाववाद के ख़िलाफ़ एक नया क़ानून बनाए जाने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि ताइवान को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा रहा है. चीन ताइवान को अपना एक प्रांत मानता है. वेन जियाबाओं ने माना कि चीन के तेज़ी से हो रहे आर्थिक विकास के कारण कई चुनौतियाँ पैदा हुई हैं. उनका कहना था कि वे अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे ताकि चीन के ग़रीब लोगों का उत्थान हो सके. पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों को चीन के आर्थिक विकास से कोई फ़ायदा नहीं हुआ है. लगभग तीन हज़ार प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के भाषण को सुना. उनका कहना था कि देश वर्ष 2005 में आठ प्रतिशत के विकास दर का लक्ष्य पाने की कोशिश करेगा और प्रयास होगा कि 90 लाख नई नौकरियाँ उपलब्ध करवाई जाएँ. |
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